करीब आधे अमेरिकियों को चॉकलेट लुभाती है और भारत में भी अब इसके प्रति दीवानगी बढ़ती जा रही है। हालत यह है कि देश में अब दीपावली जैसे परंपरागत त्योहारों पर चॉकलेट को मिठाई के विकल्प के तौर पर पसंद किया जाने लगा है।
हर वर्ष 28 अक्टूबर को अमेरिकी नेशनल चॉकलेट डे मनाया जाता है। अमेरिका में चॉकलेट का इतिहास काफी पुराना है। माया सभ्यता के लोग चॉकलेट को काफी सम्मान देते थे। वे कोको बीन्स को ईश्वर का आहार मानते थे।
इसके बाद एजटेक्स साम्राज्य में कोको बीन्स से बने उत्पादों को चाकलेटल नाम दिया गया। एजटेक्स के शासन काल में इससे मुद्राएँ भी बनाई जाने लगीं। बाद में अमेरिका में चॉकलेट का उत्पादन विश्व में सबसे तेजी से होने लगा।
द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिका सरकार ने चॉकलेट के महत्व को देखते हुए सशस्त्र बलों के लिए इसकी आपूर्ति शुरू कर दी। कई सैनिक इससे उत्साहित थे, क्योंकि संकट के समय में रसद मिलने तक वे चॉकलेट के जरिए ऊर्जा हासिल कर सकते थे।
बीते वर्ष अमेरिकी चॉकलेट कंपनियों द्वारा किया गया एक सर्वेक्षण दर्शाता है कि 52 फीसदी अमेरिकी वयस्कों को चॉकलेट सबसे ज्यादा पसंद है। भारत में भी इसकी खपत बढ़ रही है।
चॉकलेट आउटलेट आकेजंस की गुनिता बताती हैं लंबे समय तक खराब नहीं होने के कारण चॉकलेट की त्योहारों में माँग बढ़ती जा रही है। बीते करीब तीन वर्ष से हर बार त्योहारों में चॉकलेट की बिक्री में इजाफा दर्ज किया गया है।
गुनीता कहती हैं चॉकलेट को विकल्प के तौर पर पसंद किए जाने की एक वजह यह भी है कि अब लोग स्वास्थ्य कारणों के चलते ज्यादा चीनी युक्त मिठाइयों का सेवन करने से बचने लगे हैं, वहीं चॉकलेट को त्योहारों पर पसंद किया जाता है।
उन्होंने कहा कि त्योहारों में बादाम और काजू वाली चॉकलेट ज्यादा पसंद की जा रही है, जो मिठाई के तौर पर भी तोहफे में दी जाती है। चोको स्विस कंपनी की अनु बताती हैं अमेरिका जैसे पश्चिमी देशों में कुछ कड़वे जायके वाली चॉकलेट ही ज्यादा पसंद की जाती है, लेकिन भारत में मध्यवर्ग को मीठी चॉकलेट ज्यादा पसंद है।
लंबे समय तक खराब नहीं होने की खासियत के कारण लोग अब मिठाई के स्थान पर इसे तरजीह देने लगे है। अमेरिकी में देश की खपत का 40 फीसदी बादाम चॉकलेट बनाने में इस्तेमाल होता है। वहाँ चॉकलेट बनाने के लिए प्रतिमाह 35 लाख पाउंड दूध का इस्तेमाल किया जाता है।
छह से आठ वर्ष की आयु के 46 फीसदी अमेरिकी बच्चों को चॉकलेट पसंद है, जबकि नौ से 11 वर्ष की आयु के 59 फीसदी बच्चे इसे पसंद करते हैं। एक अनुमान के मुताबिक भारत में चॉकलेट की सालाना खपत 30 हजार 800 टन है। देश में नेस्ले और कैडबरी की चॉकलेट बाजार में 90 फीसदी हिस्सेदारी है।
चॉकलेट के सेहत पर प्रभाव को लेकर अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिलवेनिया ने अपने एक शोध में पाया कि एक मिल्क चॉकलेट के सेवन पर 1.04 औंस कैफीन शरीर में जाता है। इसमें उतना ही कैफिन होता है जितना एक प्याला काफी में इसलिए यह नुकसानदेह नहीं है। |