- मनोज वर्मा मालेगाँव और मोदासा बम धमाकों में हिंदू संगठनों के नाम उजागर होने के बाद भाजपा आतंकवाद के मुद्दे पर बचाव की मुद्रा में आ गई है।
आतंकवादी घटनाओं में सिमी और इंडियन मुजाहिदीन जैसे संगठनों का नाम आने पर संप्रग सरकार पर हल्ला बोलने वाली भाजपा को साध्वी प्रज्ञा को लेकर अपने शीर्ष नेताओं से संबंधों पर सफाई देनी पड़ रही है।
चुनाव के दिनों में साध्वी के साथ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और पार्टी अध्यक्ष राजनाथसिंह से नजदीकी संबंध पार्टी के भीतर और बाहर मुद्दा बन रहे हैं। पार्टी को डर सता रहा है कि कहीं आतंकवाद का मुद्दा उसे ही मध्यप्रदेश सहित अन्य विधानसभा चुनावों में भारी न पड़ जाए।
हालाँकि हिंदू आतंकवाद के मुद्दे पर भाजपा सहित पूरे संघ परिवार में दो गुट बनते दिख रहे हैं। संघ परिवार में कट्टरवादी खेमा जहाँ हिंदू संगठनों पर आतंकवाद के आरोप को ही चुनावी मुद्दा बनाने की पैरवी कर रहा है तो दूसरी तरफ भाजपा के नरमपंथी नेता इस मुद्दे पर तटस्थ रुख अपनाने पर जोर दे रहे हैं।
पार्टी का एक बड़ा धड़ा कथित हिंदू आतंकवाद को हिंदू राष्ट्रवाद के रूप में चुनावी मुद्दा बनाना चाहता है। ऐसी सोच रखने वालों को लगता है कि इस मुद्दे पर समाज में व्यापक ध्रुवीकरण होगा और पार्टी को उसका लाभ मिलेगा, लेकिन दूसरे धड़े का मानना है कि आतंकवाद को किसी धर्म से न जोड़ा जाए। (नईदुनिया) |