उत्तरप्रदेश सरकार ने रायबरेली रेल कोच फैक्टरी लिए 189 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण को निरस्त करने की पुष्टि कर दी है। मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव विजय शंकर पांडेय रविवार को बताया कि रायबरेली जिले में रेल कोच फैक्टरी स्थापना हेतु गाँव सभा की जो 189.25 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध करा दी गई थी, स्थानीय जनता के तीव्र विरोध के चलते राज्य सरकार ने शनिवार 11 अक्टूबर को अपने आदेश द्वारा अधिग्रहण की सम्पूर्ण कार्यवाही को निरस्त करते हुए इस भूमि को गाँव सभा को पुन: सौंप दिया तथा जिलाधिकारी रायबरेली को वैकल्पिक भूमि तलाश कर इस परियोजना हेतु उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। पांडेय ने बताया कि जिलाधिकारी रायबरेली ने शासन को 10 अक्टूबर को भेजी अपनी रिपोर्ट में बताया है कि रेल कोच फैक्टरी को दी गई भूमि को लेकर प्रभावित गाँवों एवं आसपास के गाँवों के निवासियों में आक्रोश है क्योंकि उन्हें यह लगने लगा है कि खाली पडी गाँव सभा की यह भूमि, जिसका पट्टा मिलने की उन्हें बहुत वर्षों से आशा थी वह एक तरह से समाप्त हो गई है।
उन्होंने बताया कि यह भी निर्देश दिए गए हैं कि इस भूमि के संबंध में जमा कराई गई धनराशि भी संबंधित संस्था को तत्काल वापस करने की कार्रवाई की जाए।
राजनीतिक हथकंडा : कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है कि उत्तरप्रदेश में घटिया राजनीति हो रही है। जब एक परियोजना काफी पहले राज्य सरकार से पूरी तरह स्वीकृत हो गई थी तो उसे अब क्यों रद्द किया जा रहा है।
कांग्रेस महासचिव और उत्तरप्रदेश में पार्टी प्रभारी दिग्विजयसिंह ने कहा कि किसी भी किसान ने लालगंज फैक्टरी के खिलाफ प्रदर्शन नहीं किया। इस तरह की कोई घटना नहीं हुई। मायावती का फैसला राजनीतिक हथकंडा है।
विकास में रोड़ा : फैसले से नाराज रेलमंत्री लालू प्रसाद ने प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती को आड़े हाथों लेते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण एवं निंदनीय बताया। प्रसाद ने कहा कि यह उत्तरप्रदेश और बिहार के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है कि वहाँ ऐसी सरकारें सत्ता में हैं, जो विकास कार्य नहीं होने देना चाहती हैं।
प्रसाद ने इसे राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि राजनीति करने के कई और रास्ते हैं, लेकिन ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए। प्राप्त जानकारी के अनुसार रेलवे ने नौ करोड़ रुपए में जमीन खरीदी थी। प्रसाद ने कहा कि इस जमीन के सारे कागजात उनके पास हैं। |