- विनोद अग्निहोत्री लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी भले ही प्रधानमंत्री पद के सबसे अधिक लोगों की पसंद हैं, वहीं हिन्दूवादियों का एक बड़ा वर्ग आडवाणी की तुलना में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस पद के लिए ज्यादा काबिल मानता है।कांग्रेस महासचिव और नेहरू-गाँधी परिवार के राजनीतिक वारिस राहुल गाँधी ने यह कहकर कि प्रधानमंत्री बनने का विकल्प उनके सामने खुला हुआ है, देश में अगला प्रधानमंत्री कौन हो, इस बहस की शुरुआत कर दी है। हालाँकि बाद में कांग्रेस ने दोहराया कि वह अगला लोकसभा चुनाव प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह की ही अगुआई में लड़ेगी, उधर खुद मनमोहनसिंह ने कह दिया है कि पार्टी और देश में उनसे भी योग्य कई लोग मौजूद हैं जो प्रधानमंत्री बन सकते हैं। इसके पहले अर्जुनसिंह, शरद पवार, लालूप्रसाद यादव जैसे यूपीए नेता भी अगले प्रधानमंत्री के लिए राहुल और मनमोहन के नाम पर अपनी-अपनी राय जाहिर कर चुके हैं। जहाँ कांग्रेस और यूपीए में प्रधानमंत्री के सवाल पर मंथन है, वहीं भाजपा और एनडीए में कोई दुविधा नहीं है। वहाँ लालकृष्ण आडवाणी को सर्वसम्मति से अगले लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया जा चुका है। हालाँकि संघ परिवार और हिंदुत्ववादी खेमे का एक बड़ा वर्ग आडवाणी से ज्यादा नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद पर देखना चाहता है।मायावती की नजर दिल्ली पर : उत्तरप्रदेश में पहली बार पूर्ण बहुमत लाकर चौथी बार मुख्यमंत्री बनीं मायावती की नजर भी प्रधानमंत्री की कुर्सी पर है। यूपीए सरकार के विश्वास मत पर दिल्ली में हुई राजनीतिक जोड़-तोड़ के दौर में वाम दलों और तथाकथित तीसरे मोर्चे के घटक दलों तेलुगुदेशम आदि ने भी मायावती को अगला प्रधानमंत्री बनाने की तैयारी कर ली थी।तब से माया की महत्वाकांक्षाएँ भी हिलोरें मार रही हैं और वह अगले लोकसभा चुनावों में 70 से 80 सांसद जुटाने का तानाबाना बुनने में जुटी हैं, जिनकी संख्याबल के आधार पर वह अपना दावा ठोंक सकें। अगले प्रधानमंत्री के नाम पर चल रही इसी बहस और सियासी कवायद के मद्देनजर नईदुनिया और सामाजिक विषयों की शोध एवं विश्लेषण संस्था सी फोर ने अक्टूबर के पहले सप्ताह में एक व्यापक जन सर्वेक्षण कराया।आडवाणी सबसे आगे : नईदुनिया-सी-फोर के इस सर्वेक्षण के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी और एनडीए के लिए यह एक अच्छी खबर हो सकती है कि अभी अगले प्रधानमंत्री पद की दौड़ में लालकृष्ण आडवाणी सबसे आगे चल रहे हैं। इससे भाजपा में भी आडवाणी विरोधियों की आवाज कमजोर होगी।भाजपा के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र के मुताबिक, आडवाणीजी जैसा परिपक्व, तपा हुआ, कुशल और सख्त प्रशासक और बड़े कद का कोई नेता किसी अन्य दल के पास है ही नहीं।भारतीय राजनीति में अटलबिहारी वाजपेयी के बाद अगर कोई प्रखर व्यक्तित्व है तो वह लालकृष्ण आडवाणी का ही है। लेकिन सर्वेक्षण में लोगों ने यह भी कहा कि आडवाणी की अटलबिहारी वाजपेयी जैसी लोकप्रियता नहीं है। अपनी कट्टर हिन्दूवादी छवि बदलने की आडवाणी ने पूरी कोशिश की है और इसके लिए उन्हें संघ नेतृत्व की आलोचना का शिकार होना पड़ा।लेकिन सर्वेक्षण के नतीजे बताते हैं इससे उनकी स्वीकार्यता बढ़ी है, तो दूसरी तरफ एक वर्ग उन्हें ऐसा अवसरवादी नेता भी मानता है जो मौके के हिसाब से अपनी राजनीति बदलने में माहिर है।दूसरे नंबर पर मायावती : आडवाणी के बाद दूसरा नंबर बसपा अध्यक्ष और उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती का है। मायावती के पक्ष में सबसे बड़ा तर्क है कि उन्होंने जातीय उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष किया है और दलित महिला होने के नाते उन्हें प्रधानमंत्री बनने का मौका मिलना चाहिए लेकिन मायावती पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की वजह से लोगों ने उन्हें अवसरवादी नेता भी माना है।कांग्रेस इस बात पर संतोष कर सकती है कि भाजपा के गुजरात मॉडल और हिन्दुत्व के नायक नरेंद्र मोदी इस दौड़ में मनमोहनसिंह और सोनिया गाँधी दोनों से ही पीछे हैं। लोगों ने उनके गुजरात मॉडल सुशासन और विकास को पसंद तो किया लेकिन प्रधानमंत्री की दौड़ में मोदी को पांचवें नंबर पर रखा।प्रधानमंत्री पद के लिए आडवाणी पहली पसंदआतंकवाद सबसे बड़ी चुनौती |
|