निर्माण सामग्री महँगी होने से लंकापति रावण, मेघनाद एवं कुंभकरण के पुतले जलाने वालों पर भी महँगाई की मार पड़ी है। महँगाई रूपी राक्षस का शिकार होने से दशहरा पर बुराइयों के उन्हें इनके पुतले बनवाने के लिए बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है।
लंकापति रावण का पुतला बनाने में इस वर्ष ज्यादा खर्च आ रहा है, क्योंकि पुतला निर्माण में उपयोग में आने वाली सामग्रियों की कीमतें पिछले वर्ष की तुलना में कई गुणा बढ़ गई है। सामग्रियों की कीमतें बढ़ने से पुतलों के दाम भी बढ़ गए हैं।
देश में सबसे ज्यादा रावण के पुतले बनाने वाली राजधानी दिल्ली के तिमारपुर स्थित रावण मार्केट के कारीगरों का कहना है कि आसमान छूती महँगाई के कारण इस बार रावण के पुते कम बनाए गए हैं। उन्होंने बताया कि पुतलों का मूल्य फुट के हिसाब से तय होता है। चालीस फुट का पुतला चार हजार रुपए तक की कीमत का होता है।
उन्होंने बताया कि ग्राहकों की पसंद के हिसाब से भी पुतले बनाए जाते हैं। इस मार्केट में चार हजार से लेकर सात हजार रुपए तक के पुतले मिल जाते हैं। बारह वर्ष की आयु से रावण के पुतले बनाने के काम में लगे कारीगर विनोद कुमार ने बताया कि इस बार रावण को भी महँगाई मार गई है।
रावण का पुतला बनाने वाले कुमार ने बताया कि पुतले बनाने के लिए बाँस, तार, रंग और कागज आदि की आवश्यकता होती है। तार की कीमत पिछले वर्ष 40 रुपए किलो थी, जो इस वर्ष बढ़कर 90 रुपए किलो हो गई है। इसी प्रकार बाँस पिछले वर्ष 350 रुपए कोड़ी था, जो इस बार बढ़कर 700 रुपए कोड़ी हो गया है। कागज 16 रुपए किलो से बढ़कर 22 रुपए किलो हो गया है।
पिछले 15 वर्ष से इस व्यवसाय से जुडे विजेन्द्र ने बताया कि इस बार दस मुखी रावण का पुतला आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। इसकी कीमत लगभग सात हजार रुपए तक है। ग्राहकों के आर्डर पर दस मुखी रावण के पुतले बनाए जाते हैं।
इस मार्केट से रावण के पुतले न केवल देश के दूसरे राज्यों में बल्कि ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका एवं ब्रिटेन आदि देशो में भी जाते हैं। रावण वाले बाबा स्वर्गीय छुटन लाल द्वारा बसाई गई इस मार्केट में सभी कारीगर छुटन बाबा के ही चेले हैं।
उन्होंने ही सबसे पहले यहाँ रावण बनाने का पुतला बनाने का काम शुरू किया था। यह मार्केट रावण के पुतले बनाने में देश का सबसे बड़ा मार्केट बन गया है।
इस मार्केट में दशहरे से तीन महीने पहले पुतले बनाने का काम शुरू हो जाता है। मार्केट में लगभग 500 कारीगर पुतले बनाने के काम में लगे हुए हैं।
मार्केट के कारीगरों का कहना है कि इस आधुनिक युग में ग्राहक अब पुतलों में सजावट की माँग करते हैं। इस बार पुतलों में विद्युत सिस्टम भी लगाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष पुतलों में बैटरी से चलने वाली लाइटें भी लगाई जा रही हैं और रंग-बिरंगे डिजाइनों वाले पुतले बनाए जा रहे है।
इस बीच राजधानी की विभिन्न रामलीला कमेटियों से जुडे लोगों ने कहा कि महँगाई का असर रावण के पुतले पर भी पड़ा है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष रावण के पुतले खरीदने के लिए ज्यादा रुपए देने पड़ रहे हैं।
हालाँकि कमेटी के लोगों का कहना है कि यह त्योहार अधर्म पर धर्म की विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता है और इस दिन समाज में फैली बुराइयों को दूर करने का प्रण लिया जाता है। अत: पुतलों की कीमतें अधिक होने के बावजूद रावण, कुंभकरण एवं मेघनाद के पुतले जलाकर बुराइयों को समाज से मिटाने का संकल्प लिया जाएगा। |