कांग्रेस का पैसा संघ वालों की झोली में। सुनकर बात अजीब लगती है, लेकिन कांग्रेस के चुनावी प्रचार अभियान का ठेका जिस प्रचार कंपनी को दिया गया है, उसकी कमान संघ और भाजपा से जुड़े एक ऐसे नेता के हाथों में है, जिन्हें भाजपा का चुनावी रणनीतिकार और धन प्रबंधक माना जाता है। यही नहीं, इस कंपनी के मालिक भाजपा के शिखर पुरुष लालकृष्ण आडवाणी के लंबे समय से कृपापात्र हैं और उनकी ख्वाहिश आडवाणी को प्रधानमंत्री पद पर देखने की है।
कांग्रेस ने लोकसभा चुनावों के लिए पार्टी के प्रचार अभियान के लिए करीब 149 करोड़ रुपए का बजट रखा है। इसके लिए पार्टी की प्रचार एवं प्रकाशन समिति ने कुछ विज्ञापन और प्रचार कंपनियों से प्रस्ताव माँगे थे।
आधा दर्जन से ज्यादा कंपनियों ने अपने प्रारूप और प्रस्ताव भेजे, जिनमें दो कंपनियों के प्रस्ताव अंतिम रूप से विचार करने के लिए मंजूर किए गए और उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को दिखाया गया। इनमें एक कंपनी वही थी जिसने 2004 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए काम किया था।
इस फैसले से दुखी कांग्रेसियों का कहना है कि कांग्रेस के ही पैसे से भाजपा के चुनाव प्रचार का भी खर्च निकालने की व्यवस्था करके हाईकमान के सिपहसालारों ने चुनावों में पार्टी का रथ पंक्चर करने का इंतजाम कर दिया है। यही नहीं, कांग्रेस के चुनाव प्रचार अभियान की जिम्मेदारी इस बार जिस विज्ञापन और प्रचार कंपनी को दी गई है, उसने ही पिछली बार भाजपा के चुनाव प्रचार अभियान की कमान संभाली थी और वाजपेयी सरकार की उपलब्धियों के बखान के लिए इंडिया शाइनिंग (भारत उदय) का नारा गढ़ा था। लेकिन भाजपा चुनाव के बाद सत्ता से बाहर हो गई।
इसी कंपनी ने उत्तर प्रदेश में पिछले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के चुनाव प्रचार अभियान को भी संभाला था और सपा भी चुनावी मैदान में खेत रही। एक जाने माने संघी पृष्ठभूमि वाले भाजपा नेता की बड़ी हिस्सेदारी इस कंपनी में है। कहा यह भी जा रहा है कि कंपनी को प्रचार का ठेका देने के पीछे कुछ कांग्रेसी नेताओं के हित भी जुड़े हुए हैं।
एक कांग्रेस महासचिव की पुत्रवधू भी एक दृश्य प्रचार कंपनी में शीर्ष पद पर हैं और उक्त महासचिव का सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी के यहाँ बेहद दखल है। यह कंपनी भी ठेका पाने की दौड़ में शामिल हुई थी।
सूत्रों के मुताबिक बड़ी चालाकी से इस महासचिव ने अपनी बहू की कंपनी के लिए प्रचार का ठेका न लेकर इस कंपनी को ठेका दिलाने के लिए अपने संपर्कों के प्रभाव का जमकर इस्तेमाल किया और बदले में इस कंपनी से क्रिएटिव्स (प्रचार फिल्मों के कैप्सूल ) बनाने का काम बहू की कंपनी के लिए ले लिया है।
सूत्रों के मुताबिक पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए पहले काम कर चुकी कंपनी से इस बार प्रस्ताव ही नहीं मागा गया। |