राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख केएस सुदर्शन ने आरोप लगाया कि भारत-अमेरिका के बीच असैन्य परमाणु करार के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने देश को गुमराह किया है। सुदर्शन ने कहा कि 45 देशों के परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) ने भारत-परमाणु व्यापार पर तीन दशक से लगे प्रतिबंध को यूँ ही नहीं उठाया। उसमें शर्त थी कि भारत स्पष्ट रूप से आश्वासन दे कि वह भविष्य में परमाणु परीक्षण नहीं करेगा।
सुदर्शन ने आरोप लगाया कि यदि भारत अपने इस आश्वासन से पीछे हटा और परमाणु परीक्षण किया तो देश को प्रतिबंधों का सामना करना पडे़गा।
इसलिए डॉ. मनमोहनसिंह का यह कहना कि भारत के परमाणु परीक्षण के अधिकार पर कोई पाबंदी नहीं है, एक झूठ है। सुदर्शन ने कहा कि आरोप लगाया कि करार से भारत के आर्थिक और सामरिक हितों को चोट पहुँचेगी।
सुदर्शन के अनुसार भारत-अमेरिका से जो दस परमाणु रिएक्टर खरीदेगा। उनसे प्राप्त बिजली की दर 2.70 रुपये प्रति यूनिट बताई जा रही है पर यदि परमाणु कचरे को नष्ट करने की लागत इसमें जोड़ी जाए तो यह नौ रुपए प्रति यूनिट पड़ जाएगी।
सुदर्शन के अनुसार दो देशों से जिन तीन सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए जाने वाले हैं। वे हैं लॉजिस्टिक सपोर्ट एग्रीमेंट, कम्युनिकेशंस इंटर ऑपरेटिबिटि एग्रीमेंट और एंड यूज मॉनीटरिंग एग्रीमेंट।
उन्होंने कहा कि पहले करार के तहत दो देश एक दूसरे के लॉजिस्टीकल इन्फ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल कर सकते हैं पर इसका लाभ अमेरिका को ही होगा। दूसरे के तहत भारत को अमेरिका से खरीदे विमानों और जहाजों पर ऐसे संप्रेषण उपकरण लगाने होंगे जो अमेरिकी उपकरणों से मिलान कर सकें।
इससे सुरक्षा को खतरा होगा। इसके अलावा एंड यूज मॉनीटरिंग करार के मुताबिक अमेरिका से खरीदे गए विमान और जहाजों का किसी भी समय उस देश के विशेषज्ञ निरीक्षण कर सकेंगे।
सुदर्शन ने कहा कि वह प्रधानमंत्री से अनुरोध करते हैं कि इन करारों पर हस्ताक्षर न करें जो देश की सुरक्षा को खतरे में डाल सकते हैं। रैली में भाजपा के अध्यक्ष राजनाथसिंह भी मौजूद थे। |