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सेतुसमुद्रम परियोजना के लिए वैकल्पिक मार्ग
उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर केंद्र सरकार ने सेतुसमुद्रम परियोजना (एसएससीपी) के वैकल्पिक मार्ग की तलाश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और इंजीनियरों के एक दल ने इलाके का सर्वेक्षण शुरू कर दिया है।

वैकल्पिक मार्ग के लिहाज से स्थान का चयन करने के लिए एक निजी प्रतिष्ठान का 15 सदस्यीय दल लगा हुआ है। एसएससीपी सूत्रों के अनुसार यह दल कम से कम एक पखवाड़े में अध्ययन करके रिपोर्ट सौंप सकता है।

सूत्रों के अनुसार इस दल ने 29 सितंबर को काम शुरू किया। मार्ग के लिए पहले भी इसी तरह का अध्ययन किया गया था, लेकिन यह पूरा नहीं हो सका।

उन्होंने कहा कि यह दल धनुषकोडी, पुराने रेलवे स्टेशन, कांबिपाड़ु, नाडुपुडू, आत्रुओदाई और अरिचल मुनाई में मिट्टी की प्रकृति जानने के लिए सर्वेक्षण कर रहा है और 70 से 90 मीटर की गहराई में खुदाई कार्य किया जा रहा है। वैकल्पिक मार्ग पर फैसला करने से पहले विशेषज्ञ इस सर्वेक्षण रिपोर्ट का अध्ययन करेंगे।

केंद्र ने पहले ही नए मार्ग की तलाश के लिए जाने-माने पर्यावरण विशेषज्ञ राजेंद्र पचौरी की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति गठित की है।

अब तक कुल छह मार्ग सुझाए गए हैं। पहले मार्ग पर भाजपा और शिवसेना ने विरोध जताया था क्योंकि इससे एडम्स ब्रिज या रामसेतु को नुकसान पहुँच रहा था।

वर्ष 2005 में शुरू की गई सेतुसमुद्रम परियोजना को चार चरणों में पूरा किया जाना था। परियोजना का पहला चरण कोदियाकराई में शुरू हुआ, जहाँ 2006 में रामसेतु के पास काम शुरू किया गया।

अनेक राजनीतिक दलों ने इसका विरोध किया और मामला दर्ज कराया गया। शीर्ष अदालत ने केंद्र से विवाद के मद्देनजर किसी अन्य मार्ग से परियोजना को पूरा करने की संभावना तलाशने को कहा।
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