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आधुनिकीकरण के लिए वरदान है माफी परियोजना
भारतीय वायुसेना ने अपने एयरफील्ड्स के आधुनिकीकरण के लिए 'माफी' नाम से यह परियोजना शुरू की है। इससे देश में हवाई पट्टियों की तस्वीर बदलने वाली है। इसके तहत 39 हवाई पट्टियों को हर तरह के विमानों की उड़ान के लिए तैयार किया जा रहा है।

माफी परियोजना के मायने हैं मार्डनाइजेशन ऑफ एयरफील्ड्स इन्फ्रास्ट्रक्चर्स (एमएएफआई) यानी माफी..। ऐसा पहली बार हुआ है कि भारतीय वायुसेना ने अपनी हवाई पट्टियों को अपग्रेड करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कम्पनियों की मदद ली है और ढाँचागत सुविधाओं के विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय टेंडर जारी किए हैं।

वायुसेना के सूत्रों ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय टेंडर में 21 कंपनियाँ शामिल हुई थीं और इनमें से नौ कंपनियों को चुना गया है। इन कंपनियों के साथ बातचीत अंतिम चरण में है और चुनी गई दो तीन कंपनियों को अपनी क्षमता दिखाने के लिए हिंडल एयरबेस पर अपना हुनर प्रदर्शित करने का अवसर दिया जाएगा।

सूत्रों ने कहा कि चुनी गई कंपनी इन एयरफील्ड्स पर हवाई पट्टी के पुनर्न‍िर्माण के अलावा रनवे की लाइटों, एटीसी के निर्माण और राडार सुविधाओं तक का विकास करेगी। यह पहला मौका है जब वायुसेना हवाई पट्टी और उसकी अन्य सुविधाओं के विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की मदद लेने जा रही है।

यह भी दिलचस्प है कि माफी परियोजना के ज्यादातर काम वायुसेना के पूर्वी सेक्टर से जुड़े हैं, जिनमें अग्रिम उड़ान पट्टियों का जीर्णोद्धार शामिल है। वायुसेना पहले से ही लद्दाख में दो अग्रिम हवाई पट्टियों को उड़ान के लिए सक्रिय करने के चरण में है।
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