दिल्ली उच्च न्यायालय ने शनिवार को पूर्व नौसेना प्रमुख एसएम नंदा के पोते संजीव नंदा की जमानत याचिका खारिज कर दी। नंदा को 1999 के बीएमडब्ल्यू हिट एंड रन मामले में पाँच साल की कड़ी सजा सुनाई गई है।
न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर ने कहा कि मेरा मानना है कि याचिकाकर्ता (नंदा) अपील विचाराधीन होने के दौरान सजा टलने का हकदार नहीं है।
अदालत ने मामले में एक प्रमुख गवाह पर प्रभाव डालकर न्याय प्रशासन में दखलंदाजी करने के लिए नंदा के खिलाफ आरोप को गंभीरता से लिया, जिसमें दो वरिष्ठ वकीलों को दोषी पाया गया।
न्यायमूर्ति गंभीर ने कहा कि यह सच हो सकता है कि याचिकाकर्ता अवमानना के मामले में सीधे तौर पर शामिल नहीं हो, लेकिन इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता कि सभी प्रयास याचिकाकर्ता को छलपूर्ण तथा अप्रिय तरीकों से कड़े कानून से बचाने के लिए लिए गए। उन्होंने शीर्ष अदालत के हालिया आदेश का भी जिक्र किया, जिसमें उपहार सिनेमा मामले में अंसल बंधुओं की जमानत निरस्त कर दी गई।
पीठ ने कहा कि नंदा का कथित अच्छा और प्रशंसनीय व्यवहार उसके खिलाफ गवाह को मनाने तथा जाँच प्रक्रिया को प्रभावित करने में शामिल होने के गंभीर आरोप में गौर करने के लिए उचित नहीं हो सकता। हालाँकि अदालत का विचार था कि मामले के जल्द निपटारे के लिए नंदा की याचिका पर दिन-प्रतिदिन के आधार पर सुनवाई की जाए। |