बढ़ते आतंकवाद से लड़ने के लिए कड़े कानूनों की वकालत करते हुए पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने शनिवार को एकीकृत खुफिया एजेंसी (यूनीफाइड इंटेलिजेंस एजेंसी) स्थापित करने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि इसमें देश के नागरिकों को भी शामिल किया जाना चाहिए। आतंकवाद को खत्म करने के लिए एक राष्ट्रीय मिशन होना चाहिए। आतंकवादी समाज में रहकर ही गतिविधियाँ चलाते हैं। वे घरों और होटलों में रहते हैं। अतः यदि लोगों को आतंकवादियों के खिलाफ लड़ाई में शामिल किया जाता है तो वे निष्फल हो जाएँगे।
कलाम यहाँ भारतीय प्रबंध संस्थान में ग्लोबलाइजिंग एंड रिसर्जेंट इंडिया थ्रू इनोवेटिव ट्रांसफॉर्मेशन (जीआरआईटी) की कक्षाओं को व्याख्यान देने के लिए मौजूद थे। उन्होंने इस दौरान आतंकवाद पर लगाम कसने के लिए राष्ट्रीय नागरिकों के पहचान कोड की भी वकालत की।
उन्होंने कहा कि हमें सख्त कानून बनाने की जरूरत है, जिससे तेजी से न्याय हो सके। उनका बयान उस समय आया है, जबकि संप्रग सरकार के समक्ष गुजरात संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक पिछले चार साल से लंबित है।
करार की पैरवी : भारत-अमेरिका परमाणु करार पर कलाम ने कहा कि भारत को 14 परमाणु ऊर्जा संयंत्र चलाने के लिए यूरेनियम की जरूरत है। हमें भारत के बाहर से यूरेनियम खरीदने की जरूरत है। हमारे पास थोरियम का दूसरा सबसे बड़ा भंडार है। हमारे वैज्ञानिक फास्ट ब्रीडर संयंत्र विकसित कर रहे हैं, लेकिन इसमें समय लगेगा। उन्होंने कहा कि परमाणु करार देश के विकास के लिए अच्छा है।
किसानों के हिमायती -सिंगूर मामले पर एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि आप किसानों से इस तरह बर्ताव नहीं कर सकते। सभी लोगों को विकास में शामिल होना चाहिए। किसानों की जमीन पर विकसित हो रहे उद्योगों पर उनके बच्चों को नौकरियाँ मिलना चाहिए।
कलाम ने कहा कि इस समय सबसे कमजोर बात यह है कि युवा राजनीति में नहीं आना चाहते और जनता की सेवा नहीं करना चाहते। उन्होंने आईआईएम अहमदाबाद के विद्यार्थियों को सार्वजनिक क्षेत्र में आने की सलाह दी।
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