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अक्सर 13 का आँकड़ा ही चुनते हैं आतंकी
ज्यादातर धमाके सप्ताहांत में अंजाम दिए गए
हाल के वर्षों में दिल्ली में शनिवार को दूसरा काला शनिवार सामने आया। इससे पहले 2005 में दीपावली से ऐन पहले हुए विस्फोट भी शनिवार को हुए थे।

देश के विभिन्न स्थानों पर हुए विस्फोटों को जोड़कर देखा जाए तो सामने आता है कि ज्यादातर धमाके सप्ताहांत में शुक्रवार और शनिवार को अंजाम दिए गए। कुछ विस्फोट मंगलवार को भी हुए और इसके अलावा तारीख 13 से भी इन विस्फोटों का नाता दिखाई देता है।

पिछले दिनों बेंगलुरु और अहमदाबाद में हुए धमाके भी सप्ताहांत में ही हुए थे। बेंगलुरु में 25 जुलाई यानी शुक्रवार को धमाके हुए थे, वहीं अहमदाबाद सिलसिलेवार धमाकों से 26 जुलाई शनिवार को दहल गया था।

वर्ष 2005 में 29 अक्टूबर के दिन दिल्ली में सरोजिनी नगर, पहाड़गंज और गोविंदपुरी इलाके में डीटीसी बस में विस्फोट भी शनिवार के दिन ही हुए थे।

जयपुर और वाराणसी में विस्फोटों के लिए आतंकवादियों ने मंगलवार का दिन चुना था। इसी साल 13 मई को जयपुर में हुए सिलसिलेवार धमाकों में 60 से अधिक लोग मारे गए थे। ये धमाके मंगलवार के दिन हुए थे। सात मार्च 2006 को वाराणसी में रेलवे स्टेशन और संकटमोचन मंदिर में धमाके हुए थे, वह भी मंगलवार का दिन था।

पिछले कुछ सालों के धमाकों का ब्योरा इस प्रकार है-
11 जुलाई 2006, मंगलवार-मुंबई की लोकल ट्रेनों में धमाके।
8 सितंबर 2006 शुक्रवार-महाराष्ट्र में नासिक के मालेगाँव की एक मस्जिद के पास धमाके।
18 फरवरी 2007 रविवार-दिल्ली से अटारी जा रही समझौता एक्सप्रेस में दो धमाके।
18 मई 2007 शुक्रवार-हैदराबाद में मक्का मस्जिद में जुमे की नमाज के दौरान धमाके।
23 नवंबर 2007 शुक्रवार-उत्तरप्रदेश के तीन बड़े शहरों वाराणसी फैजाबाद और लखनऊ में कचहरियों में धमाके।
एक जनवरी 2008 मंगलवार-उत्तरप्रदेश के रामपुर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के शिविर पर हमला।

इसके अलावा 13 तारीख से भी हमलों का नाता दिखायी देता है। वर्ष 2001 में देश की संसद पर 13 दिसंबर को आतंकवादी हमला हुआ था। जयपुर विस्फोट भी 13 मई की तारीख को हुए और शनिवार को दिल्ली में जब विस्फोट हुए, तब भी तारीख 13 ही थी, तेरह सितंबर 2008।
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