परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह की वियना बैठक में चीन के रुख पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारत ने रविवार को कहा हर संप्रभु देश को अपनी इच्छा प्रकट करने का अधिकार है, लेकिन साथ ही इस बारे में नाखुशी जताते हुए पड़ोसी साम्यवादी देश को डिमार्शे जारी किया है।
इस बैठक में परमाणु व्यापार के लिए समूह ने भारत को छूट दी। वियना में चीन के नकारात्मक रुख के बारे में पूछे जाने पर विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि मैं इस बात पर टिप्पणी नहीं करना चाहता कि किस देश ने एनएसजी में कौन-सी भूमिका निभाई। यह उनका आंतरिक मामला है।
मुखर्जी ने यह टिप्पणी चीन के विदेशमंत्री यांग जिएची के साथ दिल्ली में सोमवार को होने वाली अपनी बैठक से पहले की है, जिसमें उम्मीद की जा रही है कि भारत वियना बैठक में चीन के रुख पर अपनी निराशा प्रकट करेगा।
दूसरी ओर एनएसजी में छूट के लिए वियना में गहन बातचीत के दौरान चीन की ओर से समस्या पैदा किए जाने की पृष्ठभूमि में भारत ने डिमार्शे के जरिए बीजिंग से अपनी नाखुशी जाहिर की है।
सुविज्ञ सूत्रों ने नई दिल्ली में कहा कि भारत ने चीन से अपनी निराशा जता दी है, जो आपत्ति उठाने वाले देशों- आस्ट्रिया, न्यूजीलैंड, आयरलैंड और स्विट्जरलैंड के साथ हो गया था और ये देश चाहते थे कि उनकी चिंताएँ छूट में प्रतिविम्बित हों।
पाँच दौर की बातचीत और मुखर्जी द्वारा एक बयान जारी किए जाने के बाद भारत को एनएसजी सदस्यों में सर्वसम्मति बनने पर छूट हासिल हुई। बयान में मुखर्जी ने अप्रसार उद्देश्यों के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दोहराया।
वियना में कठिन बातचीत उस समय दुष्कर हो गई थी, जब चीन ने अलग लाइन ले ली, जिससे छूट में सर्वसम्मति में समस्या खड़ी हो गई, जबकि एनएसजी से पहले की बैठकों में उसने सकारात्मक रुख दिखाया था। चीन के दल के रुख में बदलाव तब आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने अपने चीनी समकक्ष हू जिन्ताओ से बात की।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम के नारायणन ने कहा था कि एनएसजी की बैठक में भारत अमेरिका परमाणु करार पर चीन के रुख से भारत आश्चर्यचकित रह गया था। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा यांग के साथ उठाया जाएगा और भारत कुछ निराशा प्रकट करेगा।
मुखर्जी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ परमाणु व्यापार में भारत मदद करेगा और भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड कंपनियों के साथ द्विपक्षीय समझौते पर दस्तखत करने में सक्षम होगा, जो भारत को परमाणु संयंत्र और ईंधन बेच सकेंगी।
उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ नागरिक परमाणु व्यापार करने का दरवाजा खोलेगा। उन्होंने कहा कि भारत एनएसजी छूट का स्वागत करता है और एनएसजी सदस्यों का धन्यवाद देता है तथा अंतिम परिणाम हमारी उम्मीदों पर पूरा खरा उतरता है।
मुखर्जी ने कहा कि भारत अन्य देशों के साथ परमाणु व्यापार में प्रवेश कर सकेगा। हमने अमेरिका के साथ समझौता किया है, जो 123 समझौते के रूप में है। हालाँकि वह अमेरिकी कांग्रेस की पुष्टि के अधीन है।
एनएसजी छूट पर भाजपा की आलोचना के बारे में उन्होंने कहा कि पोखरण दो परीक्षण के बाद वाजपेयी सरकार ने परमाणु परीक्षणों पर एकपक्षीय रोक की घोषणा की थी और संप्रग सरकार ने उसका पालन किया।
मुखर्जी ने कहा कि हमने इसे स्वीकार किया और मैंने परीक्षण पर अपना रुख दोहराया है जैसा कि 1998 में पोखरण दो परीक्षण के बाद तत्कालीन सरकार ने तय किया था, जिसे 18 जुलाई 2005 को प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह और अमेरिकी राष्ट्रपति बुश द्वारा जारी संयुक्त बयान में शामिल किया गया। परीक्षण में काँटा नहीं है करार-कलाम करार के खिलाफ लड़ाई जारी-माकपा मार्की ने एनएसजी को लताड़ा एटमी परीक्षण का सीधे तौर पर उल्लेख नहीं करार पर जल्दी न करे कांग्रेस भारत को आया 'करार'
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