लोगों को यह जानकर आश्चर्य होगा कि नेपाल के कुसहा के पास तटबंध तोड़ने के बाद अपनी एक नई धार बनाकर कुरसेला के पास गंगा नदी में विलीन होने से पहले लाखों लोगों को बेघर कर चुकी कोसी नाम की कोई नदी है ही नहीं, बल्कि सही मायने में वह सप्तकोसी है।
नेपाल में नदी के तटबंध टूटने के स्थान पर बीरगंज के जिला आयुक्त सहित नेपाली अधिकरियों ने बताया नेपाल से कोसी नाम की कोई नदी नहीं बहती है, बल्कि सात सहायक नदियों वाली इस नदी को सप्तकोसी कहा जाता है।
अधिकारियों ने बताया चीन के तिब्बत क्षेत्र से नेपाली क्षेत्र में 'वी' आकार में हिमालय से होकर बहने वाली इस नदी के पश्चिमी हिस्से को दूधकोसी कहा जाता है और इन दोनों देशों की सीमा पर इस नदी पर बनाए गए पुल को मैत्री संघों कहा जाता है जिसके ऊपर काठमांडू और लहासा को जोड़ने वाली आर्निको सड़क निर्मित है।
इस सड़क का नाम वास्तुकार आर्निको के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने काठमांडू घाटी में मंदिर निर्माण की पगोड़ा पद्धति का आविष्कार किया था और कालांतर में वे चीन में इस कार्य के लिए गए।
सहरसा के आयुक्त और वहाँ राहत कार्य के प्रभारी एचसी सिरोही ने बताया दूधकोसी नदी, जो सोन कोसी नदी में मिल जाती है, के बारे में बताया जाता है कि कभी उसके किनारे सोना पाया जाता था।
उन्होंने बताया सोन कोसी में देवली घाट के पास इंदिरावती नदी मिलती है और यह नदी उसी नाम से उत्तर पश्चिम से दक्षिण पूर्व की ओर हनुमाननगर स्थित बराज के उत्तर में मिलती है और वहीं सोनकोसी नदी से अरुण नदी तिब्बत से आकर मिलती है।
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