देश की सीमाओं को सुरक्षित करने की केन्द्रीय गृह मंत्रालय की रणनीति के तहत 500 से भी ज्यादा चौकियाँ स्थापित की जाएँगी। इस पर अनुमानित 1800 करोड़ रुपए का खर्च होंगे।
वरिष्ठ अधिकारी ने कहा ऐसा करने से 4097 किलोमीटर लंबी भारत-बांग्लादेश और 3323 किलोमीटर लंबी भारत-पाकिस्तान सीमा पर चौकियों के बीच की दूरी कम हो सकेगी। जहाँ भारत-बांग्लादेश सीमा पर 383 चौकियाँ बनाई जाएँगी, वहीं शेष चौकियों को भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थापित किया जाएगा, ताकि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कड़ी नजर रखी जा सके।
सबसे लंबी भारत-बांग्लादेश सीमा : मौजूदा समय में भारत-बांग्लादेश सीमा पर 802 और भारत-पाकिस्तान सीमा पर 609 चौकियाँ हैं। इसके अलावा 1751 किलोमीटर लंबी भारत-नेपाल सीमा और 699 किलोमीटर लंबी भारत भूटान सीमा पर चौकियों के बीच बेहतर संपर्क बनाने के लिए गृह मंत्रालय ने उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, बिहार और असम से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ 1400 किलोमीटर लंबी सड़क बनाने का प्रस्ताव किया है।
इस बीच भारत-पाकिस्तान सीमा पर 1912 किलोमीटर की तारबंदी और 1861 किलोमीटर इलाके में फ्लड लाइट लगाने का काम पूरा कर लिया गया है। सीमा पार अवैध गतिविधियों पर रोक में यह प्रभावी है।
फ्लड लाइट के साथ सड़क निर्माण : इस प्रकार भारत-बांग्लादेश सीमा पर 2590 किलोमीटर इलाके में तारबंदी और 3295 किलोमीटर लंबी सरहद में सड़कों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। अधिकारी ने कहा सरकार ने पश्चिम बंगाल, मेघालय, असम, मिजोरम और त्रिपुरा से गुजरने वाले 2840 किलोमीटर की लंबाई में 1328 करोड़ रुपए की लागत से 2011-12 तक फ्लड लाइट लगाने का काम पूरा करने का फैसला किया है। अंतरराष्ट्रीय सीमा के 150 गज के भीतर निर्माण कार्य करने पर बांग्लादेश की आपत्ति के कारण भारत-बांग्लादेश सीमा के कुछ हिस्सों में तारबंदी का कार्य करने में देरी हो गई है।
बांग्लादेश के सुझाव पर कड़ाई से पालन नहीं किया जा सकता, यह कहते हुए भारत ने अपनी परिधि के 15 मीटर के भीतर भी तारबंदी करने के लिए बांग्लादेश से अनुमति माँगी है।
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