-वेबदुनिया डेस्क बहुचर्चित बीएमडब्ल्यू मामले में संजीव नंदा को मिली पाँच साल की सजा देश के उन करोड़ों अमीरजादों के लिए सबक है, जिनकी जिंदगी दौलत से लदी है और दिमाग नशे का गुलाम। जाहिर है अय्याश जवानी जिंदगी की सड़क पर जब बेलगाम होकर दौड़ती है तो अंजाम बेगुनाहों की मौत के रूप में नुमाया होता है। लड़खड़ाते कदमों से सहारे की उम्मीद की भी नहीं जा सकती।
जहाँ तक बीएमडब्ल्यू मामले का सवाल है तो मदमस्त रईसजादों के जुनून की भेंट चढ़े छह बेगुनाहों की चिता की राख तो बहुत पहले उड़ गई, लेकिन कोर्ट का यह फैसला उनके परिजनों के सीने में दर्द बनकर सुलग रही आग को काफी हद तक ठंडा करेगा।
बड़े घरानों की खोखली हकीकत को सड़क पर लाने वाला बीएमडब्ल्यू मामला भारतीय परिदृश्य में नया नहीं है। इससे पहले भी बेबसी में लिपटी कई मासूम जानें मुफलिसी की कीमत अदा कर चुकी हैं।
रात की चकाचौंध में महानगरों के फुटपाथ आए दिन गरीबों के खून से सन ही जाते हैं। यह दीगर बात है कि ज्यादातर मामलों में आरोपी नोटों के पानी से जुर्म के दाग धो देता है। इसमें उसकी मदद करती है दिलदार खाकी, जिसके रहमोकरम से मामला पंचनामे पर आकर ही दम तोड़ देता है। मसला नामचीन लोगों से जुड़ा हो तो जरूर पीड़ितों को कोर्ट की दहलीज मयस्सर होती है।
हाई प्रोफाइल केस क्यों : संजीव नंदा युवा व्यावसायी हैं और वे पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल एसएम नंदा के पोते हैं। उनके पिता हथियारों के व्यवसाय से जुड़े हैं।
इस मामले में एक न्यूज चैनल ने वरिष्ठ वकीलों आरके आनंद और आईयू खान की भूमिका पर सवाल उठाए थे और एक स्टिंग ऑपरेशन किया था। चैनल का कहना था कि इस मामले के अहम गवाह सुनील कुलकर्णी को अपना बयान बदलने के लिए रुपयों को लालच दिया गया था। नशा दौलत का : 12 नवंबर 2006 को मुंबई में पाँच सितारा होटल से लौट रहे कुछ युवकों ने मुंबई में फुटपाथ पर सो रहे 7 लोगों को टोयोटो कोरोला कार से कुचल डाला। हादसे में 8 अन्य लोग जख्मी हो गए। घटना सुबह उप-नगरीय बान्द्रा के कार्टर रोड पर हुई। कार में सवार तीन लोग नशे में धुत थे। दिलचस्प बात यह है कि सारे युवक अल्प वयस्क थे। गाड़ी पर नंबर प्लेट भी नहीं थी। पुलिस ने कार से शराब की बोतल भी बरामद की।
मशहूर है मुंबई : मुंबई का उत्तर-पश्चिमी उपनगरीय शहर बान्द्रा तेज रफ्तार से गाड़ी चलाने वालों के लिए जाना जाता है। यहाँ मुंबई की कुछ प्रसिद्घ हस्तियाँ रहती हैं। यहाँ निर्माण कार्यों की बाढ़-सी आई हुई है। इनसे कई अस्थायी कामगार जुड़े हुए हैं, जो रात में सड़कों के फुटपाथ पर ही सोते हैं। मुंबई में इस तरह की घटनाएँ आए दिन होती रहती हैं। अधिकांश मामले रईसजादों, बड़े उद्यमियों और प्रख्यात लोगों से जुड़े होते हैं। बदनाम सलमान खान : 28 सितंबर 2002 की सुबह अभिनेता सलमान खान ने टोयोटा लैंडक्रूजर कार से सड़क के किनारे सोते हुए लोगों को रौंद डाला था। हादसे के वक्त सलमान नशे में धुत थे और काफी तेज रफ्तार से गाड़ी चला रहे थे। बॉम्बे बेकरी के पास हुई इस दुर्घटना में भी फुटपाथ पर सोता हुआ एक व्यक्ति बेवक्त मौत की नींद सो गया था।
बीएमडब्ल्यू मामला : एक नजर 10 जनवरी 1999 को दिल्ली के लोधी कॉलोनी इलाके में बीएमडब्ल्यू ने तीन पुलिसकर्मियों सहित छह लोगों को कुचल डाला। संजीव नंदा इस कार को चला रहे थे। पुलिस ने अभियुक्त संजीव नंदा, माणिक कपूर और सिद्धार्थ गुप्ता को हिरासत में लिया। बाद में दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत दे दी।
11 जनवरी 1999 : पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में लेने की अनुमति माँगी। 7 अप्रैल 1999 : पुलिस ने भारतीय दंड संहिता के विभिन्न धारा 304, धारा 308, धारा 201 और धारा 34 के तहत अभियुक्त के विरुद्ध आरोप पत्र दायर किया। 3 अगस्त 1999 : कोर्ट ने अभियुक्त के विरुद्ध आरोप तय किए। 18 अगस्त 1999 : कोर्ट में गवाहों के बयान दर्ज होना शुरू। 30 सितंबर 1999 : मुकदमे में अभियोजन पक्ष ने इस मामले में एक चश्मदीद गवाह सुनील कुलकर्णी की गवाही को यह कहते हुए खारिज किया कि उन्हें खरीद लिया गया है। दिसंबर 2003 : अभियोजन पक्ष के सभी गवाहों की गवाही पूरी हो गई। 61 गवाहों ने अपनी गवाही दी। 2 जनवरी 2004 : नंदा के बयानों की रिकॉर्डिंग शुरू की गई। 8 अगस्त, 2008 : दिल्ली हाई कोर्ट ने नंदा के वकील आरके आनंद और सरकारी वकील आईयू खान को गवाहों को बरगलाने के आरोप में दोषी ठहराया और चार महीनों तक वकालत पर रोक लगा दी। 2 सितंबर, 2008 : पटियाला हाउस अदालत ने संजीव नंदा को गैरइरादन हत्या के लिए और उनके तीन साथियों को सबूत से छेड़छाड़ के लिए दोषी ठहराया। |