केंद्र ने उस याचिकाकर्ता को स्कार्पीन पनडुब्बी सौदे की सीबीआई जाँच की प्राथमिक रिपोर्ट देने से इनकार कर दिया जिसने इस मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि फ्रांसीसी कंपनी थेल्स के साथ 16 हजार करोड़ रुपए के सौदे में बिचौलियों को चार फीसदी की दलाली दी गई। केंद्र ने अदालत को सूचित किया कि रिपोर्ट में संवेदनशील सूचनाएँ हैं और उनका खुलासा नहीं किया जा सकता।
याचिकाकर्ता ने इस रुख का विरोध किया। याचिकाकर्ता सेंटर फार पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन की अर्जी पर ही अदालत ने जाँच का आदेश दिया था। मुख्य न्यायाधीश एपी शाह की पीठ ने इसके बाद दोनों पक्षों की बातों को सुनने पर सहमति जताई ताकि वह इस बात पर फैसला कर सके कि क्या याचिकाकर्ता को रिपोर्ट दी जा सकती है।
अदालत ने कल अतिरिक्त सालीसीटर जनरल गोपाल सुब्रह्मण्यम से कहा था कि वह इस मुद्दे पर केंद्र से निर्देश माँगे। सरकार ने अदालत को पहले सूचित किया था कि जाँच एजेंसी को सौदे में किसी भी तरह की दलाली दिए जाने का सबूत नहीं मिला।
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