पटकथा लेखन से फिल्मी करियर की शुरुआत कर मुझे जीने दो, गाइड, ज्वेल थीफ, दोस्ताना, कुछ कुछ होता है जैसी शानदार फिल्मों से हिंदी फिल्म जगत को समृद्ध बनाने वाले प्रसिद्ध फिल्मकार यश जौहर उभरती प्रतिभाओं को निखारने के फनकार थे।
यश जौहर के पुत्र तथा बॉलीवुड के जाने-माने निर्माता निर्देशक करण जौहर ने बताया कि मेरे पिता (यश जौहर) को कला और कलाकार से काफी लगाव था। वह हमेशा नए कलाकारों को निखारने और छुपी हुई प्रतिभाओं को सामने लाने में लगे रहते थे। पटकथा लेखन से लेकर सहायक निर्माता और फिर निर्माता के तौर पर उनकी फिल्में और उसमें काम करने वाले कलाकार इस बात के साक्षी हैं।
करण ने बताया कि वर्ष 2004 में पिता की मृत्यु का मेरे जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा। उनकी मृत्यु के बाद जीवन और संबंधों के बारे में मेरी सोच पूरी तरह से बदल गई। काम के प्रति मेरा लगाव तो प्रारंभ से ही रहा था लेकिन पिता के गुजर जाने के बाद उसमें जिम्मेदारी का भाव आ गया।
उन्होंने बताया पिता की मृत्यु के बाद पता चला कि मौत किस तरह जीवन की दिशा बदल देती है। उन्होंने बताया कि मेरी आने वाली फिल्म 'दोस्ताना' पूरी तरह से मेरे पिता को समर्पित है। मेरे पिता यश जौहर ने वर्ष 1980 में फिल्म दोस्ताना बनाई थी।
गौरतलब है कि यश जौहर का जन्म छह सितंबर 1929 को हुआ तथा 26 जून 2004 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा।
करण जौहर ने बताया कि जब मेरे पिता दोस्ताना बना रहे थे उन दिनों वह काफी कठिनाइयों के दौर से गुजर रहे थे। उस समय अमित, शत्रुघ्न सिन्हा तथा जीनत ने उनकी काफी मदद की थी और फिल्म ने जबर्दस्त सफलता हासिल की। उन्होंने कहा कि पिता यश जौहर को समर्पित मेरी फिल्म दोस्ताना में अभिषेक बच्चन और जान इब्राहम काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मेरे पिता प्रतिभा को अनुशासित रूप से निखार कर एक सुन्दर शक्ल दे दिया करते थे। सिने जगत के प्रतिष्ठित अभिनेताओं से भी उनका सर्वश्रेष्ठ अभिनय करवा लेना उनका एक खास गुण रह।
पटकथा लेखक से फिल्मी करियर की शुरुआत करने वाले यश जौहर वर्ष 1962 में सुनील दत्त के प्रोडक्शन हाउस अजंता आर्ट्स से जुड़े और फिल्म मुझे जीने दो को सफलता के शिखर तक पहुँचाने में अमूल्य योगदान दिया। इसके बाद सहायक निर्माता के रूप में वह देवानंद के प्रोडक्शन हाउस नवकेतन फिल्म्स से जुड़े और गाइड, ज्वेल थीफ, प्रेम पुजारी, हरे रामा हरे कृष्णा जैसी शानदार फिल्मों को पर्दे पर लाने में अपना योगदान दिया।
यश जौहर ने वर्ष 1977 में अपनी प्रोडक्शन कंपनी धर्मा प्रोडक्शन शुरू की। इस प्रोडक्शन की पहली फिल्म दोस्ताना थी जिसने सफलता के शिखर को छूआ। अग्निपथ, गुमराह और डुप्लीकेट के बाद वर्ष 1998 में फिल्म कुछ-कुछ होता है को जबरदस्त सफलता हासिल हुई।
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