पिछले कुछ हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में भले ही 35 डॉलर प्रति बैरल की कमी आ गई हो, लेकिन घरेलू उपभोक्ताओं को किसी तरह की राहत अभी नहीं मिलेगी। सरकार ने ईंधन कीमतों में फिलहाल कटौती की संभावना को शुक्रवार को खारिज कर दिया क्योंकि तेल कंपनियों को अब भी काफी नुकसान हो रहा है।
पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने कहा हम अंतरराष्ट्रीय कीमतों में और कमी होने पर ही कीमत घटाने पर विचार करेंगे। सार्वजनिक आईओसी, एचपीसीएल तथा बीपीसीएल को लागत से कम कीमत पर पेट्रोल, डीजल, केरोसीन तथा रसोई गैस बेचने के कारण अब भी लगभग 400 करोड़ रुपए प्रतिदिन का नुकसान हो रहा है।
कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत 147 डॉलर प्रति बैरल से घटकर 112 डालर प्रति बैरल रह गई है। देवड़ा ने कहा कि सरकार डीजल के लिए दोहरे मूल्य पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि तेल कंपनियों को डीजल की बिक्री से इस साल लगभग एक लाख करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान है क्योंकि सब्सिडीशुदा ईंधन का इस्तेमाल बडे़ पैमाने पर बिजली उत्पादन में हो रहा है।
मंत्री ने सवाल उठाया कि लग्जरी कारों में यात्रा करने वालों को सब्सिडीशुदा डीजल क्यों देना चाहिए। सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोलियम मंत्रालय को सुझाव दिया है कि उद्योग जगत तथा बड़ी कारों के लिए डीजल की बिक्री 57 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से हो।
सरकार दाम घटाए : भाजपा ने माँग की कि कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय दामों में कमी को देखते हुए सरकार को पेट्रोल और डीजल के दामों में प्रति लीटर क्रमश: पाँच और तीन रुपए की कटौती करनी चाहिए।
पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि भाजपा सरकार से माँग करती है कि वह तुरंत प्रभाव से पेट्रोल और डीजल के दामों में प्रति लीटर पाँच और तीन रुपए की कमी करे। कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय दाम पिछले दो सप्ताह में 140 डॉलर प्रति बैरल से घटकर 105 डॉलर प्रति बैरल रह गए हैं।
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