विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने विश्व समुदाय विशेषकर परमाणु सामग्री आपूर्तिकर्ता देशों के समूह (एनएसजी) को परमाणु अप्रसार के बारे में भारत के रिकॉर्ड का स्मरण कराते हुए उस पर तीन दशकों से लगे परमाणु प्रतिबंधों को समाप्त करने की पुरजोर वकालत की।
उन्होंने देश के असैन्य परमाणु संयंत्रों की अंतरराष्ट्रीय निगरानी के लिए एक अतिरिक्त समझौता करने का वायदा किया।
मुखर्जी ने वियना में चल रही एनएसजी की बैठक को ध्यान में रखते हुए जारी अपने वक्तव्य में कहा कि भारत परमाणु अप्रसार व्यवस्था को मजबूत करने, स्वेच्छा से परमाणु परीक्षण रोकने, परमाणु ईंधन सीमित रखने, परमाणु तकनीक का निर्यात नही करने और मिसाइल तकनीक को गलत हाथों में नहीं पहुँचने देने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि भारत के इस रिकॉर्ड को देखते हुए उसे एनएसजी में शामिल किया जाना चाहिए, जिससे भारत के साथ साथ पूरी दुनिया को फायदा होगा।
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और विश्व समुदाय के बीच पूर्ण असैन्य परमाणु सहयोग से दुनिया में ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के खतरों का मुकाबला करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि भारत पर से प्रतिबंध हटने से अंतर्राष्ट्रीय परमाणु अप्रसार व्यवस्था और मजबूत होगी।
मुखर्जी ने संभवतः पहली बार खुलासा किया कि भारत और आईएईए के बीच अतिरिक्त निगरानी समझौता करने के लिए बातचीत चल रही है। उन्होने कहा कि हम अतिरिक्त समझौता करने और उस पर अमल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं तथा आशा है कि समझौता शीघ्र हो जाएगा।
उन्होंने परमाणु संयंत्रों के लिए ईंधन सुलभ कराने के संबंध में अंतरराष्ट्रीय ईंधन बैंक बनाने का सुझाव दिया तथा इसमें भारत के योगदान की इच्छा जताई।
भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि हम परमाणु आपूर्तिकर्ता देश बनना चाहते हैं तथा थोरियम आधारित ईंधन में हमारी मुख्य भूमिका हो सकती है।
उन्होंने कहा कि परमाणु हथियारों के बारे में भारत अपनी स्वतंत्रता कायम रखना चाहता है लेकिन यह अधिकार अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों के दायरे में ही रखेगा।
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