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बदल गया शिक्षक दिवस मनाने का तरीका
ुर्रु ब्रह्मा गुर्रु विष्णु गुर्रु देवो महेश्वर।
गुर्रु साक्षात परंब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः।
भारतीय संस्कृति में गुरु यानी शिक्षक के महत्व को कुछ इस प्रकार बताया गया है, लेकिन समय के साथ रफ्तार पकड़ते भौतिकवाद से शिक्षक दिवस भी अछूता नहीं रह गया है और पब्लिक स्कूलों से लेकर आम सरकारी स्कूलों तक के बच्चों में अपने अध्यापक को ग्रीटिंग देने की होड़ मची है।

शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर स्कूल से घर पहुँचते ही पूर्वी दिल्ली के एक नर्सरी स्कूल में पढ़ने जाने वाले पाँच साल के शौर्य ने अपने माता-पिता से अगली सुबह अपनी शिक्षिका को देने के लिए ग्रीटिंग कार्ड की माँग की। यह पूछने पर कि वह क्यों अपनी मैम को ग्रीटिंग कार्ड देना चाहता है तो उसने तपाक से कहा कि कल 'टीचर्स डे' है।

अपने बच्चे की माँग के बारे में पूछे जाने पर बैंक में काम करने वाले उसके माता-पिता संजय और मनीषा ने कहा कि उसकी माँग पूरी करनी ही होगी। इसके साथ ही उन्होंने खिन्नता प्रकट करते हुए कहा कि हर कुछ दिन के बाद स्कूल में कोई न कोई इस तरह की चीज हो जाती है, जिसके लिए उन्हें अलग से समय निकाल कर बच्चे को सामान दिलाना पड़ता है।

भारत में हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह दिवस मनाए जाने की भी एक दिलचस्प कहानी है। देश का दूसरा राष्ट्रपति बनने के बाद जब सर्वपल्ली राधाकृष्णन से उनके कुछ छात्रों और मित्रों ने उनका जन्मदिन मनाने के बारे में पूछा तो भारतीय दर्शन के इस विद्वान ने कहा कि मेरा जन्मदिन मनाने की बजाए यह ज्यादा सम्मानजनक होगा यदि 5 सितंबर शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए। तभी से देश में राधाकृष्णन के जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।
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