अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में पिछले ढाई साल में नई दवाओं के क्लिनिकल ट्रायल के दौरान 49 बच्चे की मौत के मामले में क्लीन चिट दिए जाने की संभावना है।
सूत्रों ने बताया कि एम्स में इस मामले की जाँच के लिए गठित समिति की सोमवार को दूसरी बैठक हुई और उसके बाद रिपोर्ट केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को सौंप दी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन बच्चों की मौत नई दवाओं के क्लिनिकल ट्रायल के कारण नहीं हुई बल्कि बीमारी की गंभीर स्थिति और स्वाभाविक मौत हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. अंबूमणि रामदास ने इस मामले के तूल पकड़ने के बाद इसकी जाँच का आदेश दिया था। एम्स ने जारी अपनी एक विज्ञप्ति में भी साफ कहा है कि किसी भी बच्चे की मौत क्लिनिकल ट्रायल में नहीं हुई है।
एम्स का कहना है कि एम्स में जो भी क्लिनिकल ट्रायल होते है, वे राष्ट्रीय एजेंसियों जैसे भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद, आईसीएमआर द्वारा प्रायोजित किए जाते है और एम्स की आचार संहिता समिति की मंजूरी मिलने के बाद ही किए जाते है।
इसके अलावा कुछ मंजूरियाँ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय संचालन समिति (एमएमएसी) से प्राप्त की जाती है। ये अध्ययन अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों जैसे विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रायोजित की जाती है।
संस्थान का कहना है कि एम्स की आचार संहिता समिति के निर्देशों के अनुसार से ये सभी क्लिनिकल ट्रायल बच्चों के माता-पिता या अभिभावकों की सहमति के बाद किए जाते है।
|