केन्द्र ने अपने इस दावे को मजबूती देने के लिए बुधवार को उच्चतम न्यायालय में अतिरिक्त साक्ष्य पेश किए कि प्रतिबंधित संगठन सिमी पिछले कई सालों से विध्वंसक गतिविधियों में संलिप्त है।
उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को ही यह स्पष्ट किया था कि सिमी से संबंधित मामले की सुनवाई 25 अगस्त को की जाएगी। इसके बाद केन्द्र ने बुधवार को न्यायमूर्ति बीएन अग्रवाल की पीठ के समक्ष दायर एक हलफनामे में कहा हाल के विस्फोट मामलों की जाँच में मिले सबूतों से संगठन पर लगाए गए प्रतिबंध को जारी रखने की बात जायज सिद्ध होती है।
सिमी के खिलाफ प्रतिबंध हटाने के विशेष न्यायाधिकरण के फैसले पर स्थगनादेश हासिल कर चुके केन्द्र ने दावा किया कि यदि संगठन की गैर कानूनी गतिविधियों को तुरंत नियंत्रित एवं खत्म नहीं किया गया तो यह अपनी विध्वंसक गतिविधियाँ जारी रखेगा।
सांप्रदायिक सद्भाव को खतरा : केन्द्र ने अपने हलफनामे में कहा सिमी पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया तो यह अपनी गतिविधियों और उन सदस्यों को संगठित करेगी, जो फरार हैं। यह लोगों के दिमाग को प्रदूषित कर सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुँचाएगी। राष्ट्र विरोधी भावनाओं को भड़काकर सांप्रदायिक सद्भाव को नष्ट करेगी।
सरकार ने कहा प्रतिबंध के बावजूद प्रतिबंधित संगठन का अस्तित्व बरकरार है और इसकी गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है। इस बारे में न्यायाधिकरण ने भी टिप्पणी दी थी। संगठन बरकरार है और इसकी गतिविधियाँ चोरी-छिपे चलाई जा रही हैं।
अधिकांश राज्यों में नेटवर्क : सिमी द्वारा जेहाद के नाम पर हिंसा करने का दावा करते हुए केन्द्र ने कहा संगठन जम्मू-कश्मीर एवं पंजाब में आतंकवादियों एवं उग्रवादियों को पूरा सहयोग दे रहा है। यह महाराष्ट्र, केरल, उत्तरप्रदेश एवं तमिलनाडु सहित अन्य राज्यों की विभिन्न आतंकवादी एवं विध्वंसक गतिविधियों में शामिल रहा है।
ढाई साल में 349 मामले दर्ज : केन्द्र ने कहा सिमी चोरी-छिपे अपनी गतिविधियाँ चलाने के लिए छत्री संगठनों की आड़ लेकर काम कर रही है। राष्ट्रीय स्तर पर इसके पास तहरीक तलाबा-ए-अरबिया जैसे कई संगठन हैं। सिमी धन एकत्र करने और साहित्य वितरण जैसी गतिविधियों के लिए राज्य स्तर पर 46 ज्ञात छत्री संगठनों का इस्तेमाल कर रही है। फरवरी 2006 से पहले तक विभिन्न राज्यों में प्रतिबंधित संगठन के सदस्यों पर 349 मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
संगठन पर फरवरी 2006 में फिर से प्रतिबंध लगाए जाने के बाद से इसके सदस्यों पर भारतीय दंड संहिता हथियार एवं विस्फोटक सामग्री कानून एवं गैर कानूनी गतिविधियाँ (नियंत्रण) कानून के विभिन्न प्रावधानों के तहत 60 मामले दायर किए जा चुके हैं।
सरकार ने कहा न्यायाधिकरण ने अधिसूचना रद्द करते समय यह कहकर गलती की है कि फिर से प्रतिबंध लगाना इसके पूर्व आदेश का महज दोहराव है और इसका पर्याप्त आधार नहीं है।
हलफनामे में कहा गया कि न्यायाधिकरण अधिसूचना जारी करने के बारे में इसके विचारार्थ दिए गए कैबिनेट नोट को उचित महत्व देने और इसे निर्णय के आधार के रूप में देखने में नाकाम रहा।
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