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भगवान वेंकटेश्वर हैं उद्योगपतियों के प्रिय
संदीप तिवारी
व्यापार के लिए शुभ मुहूर्त निकलवाना हो या कारोबार के लिए नए काम की शुरुआत की तिथियों की जानकारी करनी हो, इन बातों के लिए आम आदमियों की तरह बड़े-बड़े उद्योगपति, कारोबारी और व्यवसायी भी धार्मिक स्थानों की यात्रा करने को लालायित रहते हैं। बड़े-बड़े धर्मगुरुओं का आशीर्वाद लेने से अरबपतियों को भी परहेज नहीं होता। यह बात अलग है कि ये लोग अपनी धार्मिक यात्राओं को जहाँ तक संभव हो सके, मीडिया के प्रचार-प्रसार से बचाने की कोशिश करते हैं।

इस मामले में उल्लेखनीय है कि तिरुपति की तिरुमाला स्थित पहाड़ियों पर स्थित भगवान वेंकटेश्वर का मंदिर आम आदमियों के साथ-साथ खास लोगों के मध्य भी लोकप्रिय है। ये लोग काम के दबाव से थोड़ी राहत पाने के लिए देवी देवताओं के दरवाजों पर मत्था टेकते नजर आते हैं।

पिछले सप्ताह ही टाटा ग्रुप के प्रमुख रतन टाटा ने भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन किए। उनकी इस तिरुपति यात्रा के दौरान टाटा टी के चेयरमैन कृष्‍ण कुमार भी साथ गए थे। दोनों ही मंदिर में करीब आधा घंटे तक रहे लेकिन इस यात्रा के बारे में सूत्रों का कहना है कि धार्मिक मंदिरों की यात्रा करने वाले टाटा अकेले उद्योगपति नहीं हैं। ज्यादातर उद्योगपति, कारोबारी, व्यवसायी किसी भी बड़े काम की शुरुआत करने से पहले भगवान को याद कर लेना ठीक समझते हैं।

तिरुपति टाटा का ही नहीं वरन अनिल अंबानी का भी प्रिय मंदिर है। मंदिर सूत्रों का कहना है कि हर वर्ष कम से कम दो बार वे मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन करने जरूर आते हैं। वर्ष 2002 से पहले उनके पिताजी धीरुभाई अंबानी भी जिंदा थे तब अनिल ने कैलाश मानसरोवर की परिक्रमा की थी। तीन दिन तक चलने वाली चढ़ाई को उन्होंने पैदल ही पूरा किया था। भगवान शिव के भक्त अनिल अंबानी अमरनाथ यात्रा पर भी नियमित तौर पर जाते हैं और अगर उनकी कारोबारी गंतव्यों के आसपास कोई प्रसिद्ध धार्मिक स्थान होता है तो वे वहाँ जाना नहीं भूलते।

रिलायंस कंपनी के बँटवारे से पहले भी उन्होंने देश भर के मंदिरों की यात्राएँ की थीं। उनके मित्र और सुपरस्टार-व्यवसायी अभिताभ बच्चन भी तिरुपति क‍ी यात्रा पर जाते हैं। मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर की पैदल यात्रा भी वे अपने बेटे-बहू के साथ करते हैं। जब से उनका कारोबार प्रभावित हुआ था तभी से वे गणपति के भक्त बन गए थे। मंदिरों, धार्मिक स्थलों की यात्रा की शुरुआत करने के बाद ही उनका टीवी शो ' कौन बनेगा करोड़पति' बेहद लोकप्रिय हुआ था।

धार्मिक स्थलों पर सक्रिय रहने वाले पंडितों, पुजारियों का कहना है कि कारोबारी लोगों, उद्‍योगपतियों के बीच मध्य सामान्य सी बात है कि वे जब कभी किसी धार्मिक स्थान पर जाते हैं तो वहाँ पूजा-अर्चना जरूर करते हैं। इसी तरह महत्वपूर्ण तीज त्योहारों पर भी उन्हें धार्मिक स्थलों पर देखा जा सकता है। इन स्थानों पर धार्मिक अनुष्ठानों को पूरा कराने के लिए 25-30 पुरोहितों, पुजारियों का होना सामान्य बात है।

अपने एक विदेशी दौरे पर सत्यनारायण गोयनका बीमार पड़ गए थे। उस समय एक गुरु ने उन्हें विपश्यना साधना की तकनीक सिखाई और इसका असर यह हुआ कि बाद में उन्होंने समूचे महाराष्ट्र में विपश्यना को सिखाने के लिए केन्द्र खुलवाए। धार्मिक अनुष्ठानों के अलावा ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु आदि में भी इन लोगों को बहुत भरोसा होता है।

मुंबई में रहने वाले मुरली कृष्णन एक सफल वास्तु विशेषज्ञ हैं। उनका दावा है कि उनकी सलाह से कई कंपनियों के कामकाज में जबर्दस्त सुधार हुआ है। वाशी की एक आईटी कंपनी की हालत तो इतनी खस्ता हो गई थी कि यह नुकसान में चलने लगी थी। तब कंपनी ने कृष्णन को बुलाया। उन्होंने सलाह दी कि कंपनी की इमारत के उत्तर-पूर्व दिशा में जो कबाड़खाना रखा गया था, उसे वहाँ से पूरी तरह हटा लिया जाए। भवन के इसी स्थान पर टॉयलेट्‍स भी बने थे, जिन्हें दूसरी जगह पर बनवाया गया। जब इस स्थान को पूरी तरह से खाली करा दिया गया तो कंपनी की हालत सुधरती चली गई।

वे कहते हैं कि कई अन्य कंपनियों की भी ऐसी ही स्थिति थी जिन्हें उनकी सलाह से सुधारा गया। उनका दावा है कि करीब आधा दर्जन कंपनियों के भवनों के दक्षिण पश्चिम में भारी मशीनरी रखी गई थी, लेकिन जब इसे वहाँ से हटाया गया और सभी कुछ वास्तु शास्त्र के अनुरूप बना दिया गया तो इनकी भी स्थिति सुधर गई।

एक और वास्तु शास्त्री का दावा है कि दक्षिण के श्रीरंगम् स्थित हनुमान मंदिर का प्रसाद माइक्रोसॉफ्ट के कुछ कर्मचारी बिल गेट्‍स के लिए ले जाया करते थे। इन कर्मचारियों का दावा है कि बिल गेट्‍स ने भी अपना घर वास्तुशास्त्र के नियमों के अनुरूप ही बनवाया है।
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