भाकपा ने मीडिया ट्रायल पर चिंता जताई और कहा कि यह खेद का विषय है कि हाल ही में कुछ चैनलों द्वारा अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने से ऐसा लगता है कि लोगों को सांप्रदायिक और धर्मनिरपेक्ष दो भागों में बाँटने की कोशिश की जा रही है।
भाकपा के केन्द्रीय सचिवालय ने एक बयान में कहा कि हाल ही में ऐसा लग रहा है कि मीडिया ट्रायल द्वारा जाँच एजेन्सी की अंतिम रिपोर्ट आने के पहले ही कई मामलों में फैसले सुना दिए जाते हैं।
भाकपा ने कहा कि आरुषी हत्याकांड में भी मीडिया का व्यवहार ऐसा था कि उच्चतम न्यायलय को यह मजबूर होकर कहना पड़ा कि उसे ऐसी खबरों से बचना चाहिए जिसका असर या तो बचाव पक्ष पर पडता है यह उन लोंगो की छवि खराब करता है जो मामले से जुड़े हुए हों।
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