अमरनाथ यात्रियों की सुविधाओं के लिए बरसों से इस्तेमाल हो रही भूमि का प्रयोग जारी रहना चाहिए। यह केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि वह जम्मू-कश्मीर के हालात सामान्य बनाने के लिए राज्य के दोनों पक्षों से तुरंत वार्ता की पहल करे।
यह बात माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य सीताराम येचुरी ने कही। संघ परिवार और हुर्रियत नेताओं दोनों से जम्मू और कश्मीर घाटी में अपने-अपने आंदोलन स्थगित करने की अपील करते हुए पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य सीताराम येचुरी ने यहाँ कहा आजादी के साठ साल से ही नहीं, बल्कि सैकड़ों वर्षों से अमरनाथ यात्रा के दौरान सुविधाएँ मुहैया कराने के लिए इस विवादास्पद भूमि का उपयोग होता आ रहा है और इसे जारी रहना चाहिए।
उन्होंने कहा विवादास्पद भूमि ही नहीं, बल्कि अमरनाथ यात्रा के समय अन्य बिन्दुओं पर भी भूमि उपलब्ध कराए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा देश में हर धर्मावलंबियों की तीर्थ यात्राओं को सरकार और अन्य एजेंसियों द्वारा सुविधाएँ प्रदान करने की परंपरा है। इसमें विघ्न नहीं डाला जाना चाहिए।
माकपा नेता ने कहा यह मामला भूमि हस्तानांतरण का नहीं है। जैसा कि आरएसएस और भाजपा पेश कर रही है। यह मामला तो तीर्थयात्रियों को महज दो महीने के लिए सुविधाएँ मुहैया कराने का है। उन्होंने कहा यह सुनिश्चित करना सरकार का काम है कि वह इस संदर्भ में जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के आदेश का किस तरह पालन करती है।
येचुरी ने कहा विवाद के सौहार्दपूर्ण हल के लिए एक ओर सरकार को दोनों पक्षों से वार्ता की पहल करना चाहिए। भाजपा को जम्मू में तथा हुर्रियत को घाटी में चलाया जा रहा आंदोलन फौरन स्थगित कर देना चाहिए।
समस्या के हल का सुझाव देते हुए उन्होंने कहा केन्द्र को पहले विवादास्पद भूमि के पक्ष और विरोध में जम्मू और कश्मीर घाटी में चल रहे आंदोलनों के नेताओं से अलग-अलग बात करना चाहिए और बाद में दोनों पक्षों को एक साथ बैठा कर सौहार्दपूर्ण हल निकालने की पहल करना चाहिए।
उन्होंने कहा यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राजनीतिक कारणों और राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए विवादास्पद भूमि के पक्ष और विरोध में आंदोलन चलाए जा रहे हैं।
|