केंद्र सरकार ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में एक अपील दाखिल कर स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) पर से प्रतिबंध हटाने के दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश को चुनौती दी।
न्यायमूर्ति गीता मित्तल की अध्यक्षता वाले विशेष न्यायाधिकरण के फैसले को चुनौती देने वाली अपील पर आगामी 25 अगस्त को सुनवाई होगी। मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले पर हाल ही रोक लगा दी थी।
केन्द्र ने अपनी अपील में कहा है कि उच्च न्यायालय ने दस्तावेजों और देश की प्रमुख खुफिया एजेंसियों इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रा) और अन्य एजेंसियों के 75 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों के तर्कों की अनदेखी की।
अपील में कहा गया कि हाल ही में गुजरात के अहमदाबाद में हुए बम विस्फोटों में सिमी मुख्य संदिग्ध में रूप में सामने आया है और गुजरात पुलिस ने सिमी के 10 कार्यकर्ताओं को भी गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों ने प्रतिबंधित सिमी का नामकरण इंडियन मुजाहिदीन कर दिया है और उन्होंने विस्फोटों की जिम्मेदारी भी ली है।
केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार सिमी आतंकवादी और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल है और केन्द्र सरकार ने उसे अवैधानिक गतिविधियाँ नियंत्रण अधिनियम के तहत प्रतिबंधित किया था।
अपील के अनुसार उच्च न्यायालय ने गत पाँच अगस्त को 260 पृष्ठों से अधिक के अपने फैसले में गलत निष्कर्ष निकाला कि सिमी पर प्रतिबंध को न्यायोचित बताने के लिए उसके विरुद्ध ताजा साक्ष्य नहीं मिले हैं। केन्द्र ने वर्ष 2001 में सिमी पर प्रतिबंध लगाया था और वर्ष 2006 में उस प्रतिबंध को दो वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया था।
न्यायमूर्ति एसबी सिन्हा की उच्चतम न्यायालय की पीठ ने सिमी को राष्ट्र विरोधी संगठन करार दिया था और उसके कार्यकर्ताओं को आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त बताया था।
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