कांग्रेस महासचिव और सांसद राहुल गाँधी ने एक समय अपने पिता को राजनीति छोड़ने की सलाह दी थी।
राहुल ने यहाँ केंद्रीय पंचायतीराज मंत्री मणिशंकर अय्यर द्वारा राजीव गाँधी पर लिखी अंग्रेजी किताब के हिन्दी संस्करण के लोकार्पण समारोह में वर्ष 1989 के एक व्यस्त चुनावी अभियान के दौरान अपने पिता के साथ गुजारे समय का जिक्र करते हुए उक्त जानकारी दी।
उन्होंने कहा जीवन के प्रारंभिक दौर में राजनीति में कदम रखने से कतराने वाले उनके पिता ने राजनीति इसलिए नहीं छोड़ी, क्योंकि उन्हें गरीबों से लगाव था।
राहुल ने कहा राजीव ने 21वीं सदी के भारत का भविष्य देखा था। वह भारत के लोगों के कारण राजनीति से जुड़े रहना चाहते थे। पंचायती राज तथा सूचना प्रौद्योगिकी से करोड़ों लोग जुड़े हैं। ये दोनों ही उनके सपने थे।
उन्होंने कहा एक आम भारतीय का सशक्तिकरण होना राजीव गाँधी का सपना था। लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए मणिशंकर अय्यर ने कहा राजीव गाँधी के 64वें जन्मदिन की पूर्व संध्या पर 21वीं सदी के भारत के लिए उनके सपने को याद करना प्रासंगिक होगा।
भविष्य के लोकतंत्र के लिए राजीव चार आधारों को आवश्यक मानते थे। पंचायती राज गरीबोन्मुख आर्थिक नीति धर्मनिरपेक्षता और गुटनिरपेक्षता।
अय्यर ने कहा उनकी यह किताब 15 साल पहले लिखी गई थी, जिसका हिंदी अनुवाद आया है। यह किताब राजीव के साथ उनके पारिवारिक संबंधों के विषय में नहीं, बल्कि एक नौकरशाह के रूप में प्रधानमंत्री के साथ जुड़े उनके संस्मरणों से संबंधित हैं।
समारोह में दो पुस्तकों वैश्विक सदभाव और राजीव गाँधी तथा तकनीकी विकास और भारत का उन्नयन नामक दो किताबों का लोकार्पण किया गया। पहली पुस्तक का अनुवाद तथा एक अन्य का लेखन अमेठी के लेखक जगदीश जोशी ने किया है।
कार्यक्रम में गृहमंत्री शिवराज पाटिल, केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा, सांसद मार्गरेट अल्वा, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मोतीलाल वोरा और कवि अशोक चक्रधर सहित कई केंद्रीय मंत्री तथा वरिष्ठ नेता उपस्थित थे।
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