अमरनाथ बोर्ड को भूमि वापस लौटाने हेतु दबाव बनाने के लिए जम्मू क्षेत्र के विभिन्न थानों में मंगलवार को करीब दो लाख प्रदर्शनकारियों ने गिरफ्तारियाँ दी। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएँ भी शामिल थीं। दूसरी ओर अमरनाथ संघर्ष समिति ने भाजपा को आंदोलन से दूर रहने की सलाह दी है।
इस बीच जम्मू, सांबा, उधमपुर और किश्तवाड़ जिलों में अलग-अलग अवधि तक कर्फ्यू में ढील दी गई। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने थाने और चौकियों के अंदर एवं पास में प्रदर्शन किए। वे 'बम-बम भोले और एक-दो-तीन-चार, भोले तेरी जय जयकार' जैसे नारे लगा रहे थे। अमरनाथ संघर्ष समिति के नेताओं ने दावा किया है कि साढ़े तीन लाख से अधिक लोगों ने जम्मू क्षेत्र के 10 जिलों में गिरफ्तारियाँ दी हैं। उन्होंने दावा किया कि गिरफ्तारियाँ देने वालों में करीब 30 प्रतिशत महिलाएँ हैं। प्रदर्शनकारियों ने आज शाम अभिनव थियेटर में आयोजित एक सरकारी सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी बाधा डाली। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए त्वरित कार्रवाई बल (आरएएफ) जवानों ने लाठीचार्ज किया और आँसूगैस के गोले छोड़े। बाद में कार्यक्रम रद्द कर दिया गया।
समिति को बातचीत का न्योता : राज्य सरकार ने आज जमीन आंदोलन का नेतृत्व कर रही श्री अमरनाथ संघर्ष समिति को बातचीत का अपना निमंत्रण फिर से दिया ताकि जटिल मुद्दे का समाधान निकाला जा सके। इस बारे में एक पत्र समिति के संयोजक लीलाकरण शर्मा को भेजा गया है।
पुलिस पर आरोप : जम्मू में एक मीडिया हाउस पर हुए हमले की निंदा करते हुए संघर्ष समिति ने आज पुलिस पर आरोप लगाया कि वह मीडियाकर्मियों को निशाना बना रही है। संघर्ष समिति के नेता नरिन्द्रसिंह, केके खोसा और तिलकराज शर्मा ने कहा कि समिति के पास विश्वसनीय जानकारी है कि राज्य सरकार ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) को मीडिया हाउसों पर हमले करने का काम सौंपा है।
भाजपा को दूर रहने की सलाह : अमरनाथ आंदोलन को दलीय राजनीति से ऊपर रखने का संकेत देते हुए खबरों के अनुसार संघर्ष समिति ने भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी और राजनाथसिंह से 25 अगस्त को होने वाली रैली में शामिल नहीं होने के लिए कहा है।
जम्मू में 25 अगस्त को एसएएसएस की होने वाली रैली में आडवाणी और सिंह को भी संबोधित करना था। इस आशय की घोषणा भाजपा के प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने सोमवार को की थी। समिति आंदोलन को राजनीति से हटकर रखना चाहती है। समिति के संयोजक लीलाकरण शर्मा आरएसएस से जुड़े रहे हैं, वहीं दूसरे नंबर के पदाधिकारी डीएस सलाथिया कांग्रेस से हैं।
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