सूचना के अधिकार के तहत सही समय पर पूरी सूचना मुहैया नहीं कराने पर केंद्रीय सूचना आयोग ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को कड़ी फटकार लगाते लगाई और आयोग को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्णय किया है।
सीआईसी के सूत्रों ने बताया केंद्रीय सूचना आयुक्त ओपी केजरीवाल ने अपने हालिया फैसले में सही समय पर पर्याप्त सूचना मुहैया नहीं कराने के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को कड़ी फटकार लगाते हुए उन्हें आरटीआई अधिनियम की धारा 20 (1) के तहत कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्णय किया है।
सीआईसी के सूत्रों ने बताया राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे यह स्पष्टीकरण माँगा जाएगा कि सूचना का अधिकार के तहत पूरी सूचना मुहैया नहीं कराने सूचना का अधिकार अधिनियम में दी गई समय सीमा के बाद सूचना देने तथा आरटीआई आवेदन वापस करने के कारण उन पर जुर्माना क्यों नहीं लगाया जाए।
सूचना आयोग के सूत्रों ने बताया राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने आवेदनकर्ता के रवींद्र बाबू को न तो समय पर और न ही पर्याप्त सूचना मुहैया कराई। सीआईसी सूत्रों ने यह भी कहा कि सुनवाई के दौरान रवींद्रबाबू ने यह भी कहा कि एक अन्य आरटीआई आवेदन को मानवाधिकार आयोग ने यह सलाह देते हुए वापस कर दिया कि पहले उसे इस संबंध में शिकायत दर्ज करना चाहिए। फैसले के अनुसार प्रतिवादी ने अपनी सफाई में कहा कि आवेदन अच्छी मंशा से वापस किया गया, क्योंकि इस स्तर पर कोई सूचना उपलब्ध नहीं कराई जा सकती थी। आयुक्त ने कहा मुझे नहीं लगता कि इस अधिनियम में कोई ऐसा प्रावधान है, जिसके तहत आवेदन को वापस कर दिया जाए, जैसा कि मानवाधिकार आयोग ने किया है।
उन्होंने कहा अतः केंद्रीय सूचना आयोग ने यह निर्णय किया है कि इस अधिनियम की धारा 18 (1) ए के तहत कारण बताओ नोटिस जारी कर यह पूछा जाए कि क्यों नहीं पाँच हजार रुपए का जुर्माना उन पर लगाया जाए।
दूसरी ओर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सूत्रों ने बताया आज-कल लोग अपनी शिकायत भी आरटीआई के तहत दायर करते हैं। पिछले एक महीने में हमें 10 से 15 ऐसे मामले मिले हैं।
सूत्रों ने कहा हमारे पास जो सूचना उपलब्ध थी, उसे हमने रवींद्र बाबू को मुहैया करा दी। हमने आवेदन वापस नहीं किया, बल्कि हमने उन्हें ऐसा करने की सलाह दी थी, क्योंकि उस स्तर पर कोई सूचना उपलब्ध नहीं थी।
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