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तब दुनिया ही बदल गई शौकत की
-वेबदुनिया डेस्क
वर्ष 1947 में हैदराबाद क‍ी एक युवा लड़की शौकत एक मुशायरे में शायर कैफी आजमी से मिली थी। दोनों के बीच प्यार हुआ और इसी वर्ष शादी भी हो गई। इसी के साथ ही भारतीय थिएटर की दिग्गज हस्ती शौकत आजमी के थिएटर जीवन की भी शुरुआत हुई थी। 23 मई, 1947 को दोनों का विवाह हुआ और वे मुंबई चले आए। इसी वर्ष फिल्मकार ख्वाजा अहमद अब्बास की पत्नी ने शौकत को इंडियन पीपुल्स थिएटर एसोशिएशन (इप्टा) में काम करने के लिए बुलाया।

उस समय के लिहाज से थिएटर के नाटक भी हिन्दू-मुस्लिम एकता, गरीब‍ी, बेकारी, महिला अधिकार आदि विषयों से जुड़े रहते थे। इस दौरान उन्हें बलराज साहनी, भीष्म साहनी, ख्वाजा अहमद अब्बास और पृथ्‍वीराज कपूर जैसे दिग्गजों के साथ काम किया। उनका पहला नाटक 'धानी बाके' इस्मत चुगताई की कहानी पर आधारित था और इसका निर्देशन भीष्म साहनी ने किया था।

बाद में जोहरा सहगल ने उन्हें पृथ्वी थिएटर में काम करने के‍ लिए बुलाया, जहाँ उन्होंने 100 रुपए मासिक पर नाटकों में काम करने की नौकरी कर ली। यहाँ उन्होंने सात नाटकों में काम किया पर इस दौरान देश के विभिन्न इलाकों में काम करते हुए घूमने का उन्हें मौका मिला।

बाद में उन्होंने अलेक पद्मसी के नाटकों में भी भाग लिया, लेकिन उन्हें ऑल इंडिया रेडियो में नौकरी करनी पड़ी। एक एनाउंसर के तौर पर काम करते हुए उन्होंने विविध भारती के शो मनचाहे गीत की शुरुआत की। तब कैफी आजमी कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्णकालिक सदस्य हुआ करते थे और उन्हें पार्टी 45 रुपए महीना देती थी। उस समय शबाना और बाबा आजमी छोटे-छोटे थे तब घर चलाना कठिन हो रहा था।

यह देखते हुए कैफी ने फिल्मों में गाने लिखने शुरू कर दिए और शौकत थिएटर का अपना काम करती रहीं। 1960 में 'पगली' नाटक में अभिनय के लिए शौकत को पुरस्कृत किया गया, जिसे फिल्म अभिनेता सज्जन ने निर्देशित किया था। वर्ष 1983 में उन्होंने स्टेज को अलविदा कह दिया, लेकिन थिएटर से उनका नाता बना हुआ है। वे इप्टा की सदस्य हैं और इसकी बैठकों में भाग लेती हैं तथा नियमित तौर पर इसके नाटक भी देखती हैं।

आजकल के थिएटर के बारे में शौकत आजमी का कहना है कि पहले यह बामकसद हुआ करता था, लेकिन अब इसके साथ मकसद या मिशन जैसी कोई चीज नहीं है। हालाँकि यह बात और है कि तकनीक और आर्थिक रूप से अब यह काफी सशक्त हो गया है और व्यावसायिक रूप से सफल भी हो रहा है।
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