केन्द्र में मनमोहनसिंह सरकार के बचने से न केवल कांग्रेस, यूपीए के घटक दल, मुलायम और अमरसिंह ही खुश हैं वरन केन्द्र सरकार से वामपंथियों के समर्थन वापस लेने से बांग्लादेश की विवादास्पद लेखिका तसलीमा नसरीन भी खुश हैं।
कारण बिलकुल साफ है। कामरेडों के सत्ता के गलियारों से बाहर जाते ही सरकार न केवल तसलीमा को भारत में वरन कोलकाता में रखने के लिए आतुर है, जबकि पिछले वर्ष ही शहर के एक कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन के दबाव में उन्हें पहले कोलकाता और बाद में कामरेडों के दबाव में देश से बाहर कर दिया गया था।
पिछले पाँच माह से स्वीडन में रह रही तसलीमा ने कुछेक दिनों पहले ही टेलीफोन पर एक बड़े सरकारी अधिकारी से बात की तो उन्हें आश्वस्त कराया गया कि उनकी भारत लौटने की व्यवस्था हो सकती है। सूत्रों का कहना है कि कुछ दिनों पहले तसलीमा से कहा गया था कि जब तक सरकार विश्वास मत जुटाने के संकट से पार नहीं पा लेती तब तक वे वहीं ठहरी रहें। अगस्त के महीने में उन्हें वापस बुला लिया जाएगा।
सूत्रों का यहाँ तक कहना है कि विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी ने खुद तसलीमा को आश्वस्त कराया है कि वापस लौटने पर वे भारत में कोलकाता समेत कहीं भी रहने के लिए स्वतंत्र होंगी। समझा जाता है कि सरकार ने उनकी वीजा की अवधि भी बढ़ा दी है।
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