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राम ने तोड़ दिया था रामसेतु!  Search similar articles
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि वह विवादास्पद सेतुसमुद्रम परियोजना का वैज्ञानिक एवं राजनीतिक रूप से व्यावहारिक हल निकालने की संभावना तलाशने के पक्ष में है, जबकि केंद्र ने परियोजना को रोकने के लिए धार्मिक आधार बताए जाने पर सवाल उठाया।

वरिष्ठ एडवोकेट फली एस. नरीमन ने केन्द्र की ओर से पेश होते हुए परियोजना का विरोध करने वालों की यह कहकर आलोचना की कि वह धार्मिक एवं आस्था के मामले उठाकर इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग इस परियोजना में अड़चन डालने के लिए धर्मग्रंथों से जुड़ी आस्था पर भरोसा कर रहे हैं उन्हें आस्था के अन्य पहलुओं पर भी गौर करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि 'कम्ब रामायण' तथा 'पद्म पुराण' का उल्लेख करते हुए इस ओर ध्यान दिलाया कि भगवान राम ने रामसेतु को खुद नष्ट कर दिया था ताकि कोई लंका से नहीं आ सके।

नरीमन ने मुख्य न्यायाधीश केजी बालकृष्णन की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ को बताया कि भगवान राम ने पुल को नष्ट कर दिया था और इसका विस्तृत विवरण धर्मग्रंथो में है। आप उस किसी चीज की पूजा नहीं कर सकते जो नष्ट कर दी।

परियोजना विरोधी याचिकाकर्ताओं की दलील का जवाब देते हुए नरीमन ने कहा कि हम कोई पुल नष्ट नहीं कर रहे। परियोजना में हर चीज को बेहद सावधानी से किया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि रातसेतु परियोजना से लोगों की आस्था पर चोट पहुँची है।

प्रसिद्ध न्यायविद ने कहा कि अगर हमने गलती की है तो हम उसमें सुधार करेंगे। विचार है परियोजना पर आगे बढ़ा जाए। हमें देखना होगा कि कानून का उल्लंघन नहीं होने पाए।

खंडपीठ ने हालाँकि स्पष्ट किया कि फिलहाल इस बारे में किसी बहस में पड़ना उचित नहीं है कि रामसेतु अथवा एडम्स ब्रिज मानव निर्मित था अथवा नहीं। नरीमन ने कहा कि अगर आप आस्था पर भरोसा करने जा रहे हैं तो आस्था के अन्य पहलुओं पर भी गौर करें।

नरीमन ने कहा कि सदियों और सालों से रामसेतु को पुरातत्व के लिहाज से स्मारक बनाने के प्रति किसी ने परवाह नहीं की। अब ऐसा मानने वालों को जानना चाहिए कि कम्ब रामायण के अनुसार भगवान राम ने एक तीर से पुल के तीन टुकड़े कर दिए थे।

खंडपीठ में न्यायमूर्ति आरवी रवीन्द्रन तथा जेएम पांचाल भी हैं। नरीमन ने बताया रामायण और रामसेतु के अस्तित्व पर सवाल उठाने वाले विवादास्पद हलफनामों को असंगत परिस्थितियों में वापस ले लिया गया।

भगवान राम द्वारा पुल को नष्ट किए जाने के मुद्दे पर नरीमन के आने से पहले खंडपीठ चाहता था कि किसी संतुलित समाधान के लिए केन्द्र को चाहिए कि वह आस्था एवं पर्यावरण संबंधी चिंताओं को दूर करने की संभावना तलाशे।

पीठ ने कहा कि एक वैज्ञानिक, राजनीतिक और तकनीकी समाधान पर विचार किया जा सकता है तथा साथ में आर्थिक पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए क्योंकि तलछट की सफाई करने की प्रक्रिया जारी है।

पीठ की इस टिप्पणी पर नरीमन ने सकारात्मक रुख दिखाया कि परियोजना में आस्था का ध्यान रखा जाना चाहिए लेकिन वह विपक्षियों की इस राय से सहमत नहीं दिखे कि एलाइनमेंट संख्या चार (रामेश्वरम से धनुषकोटि तक) एक लागू होने योग्य विकल्प है।

उन्होंने कहा कि एलाइनमेंट-4 को अपनाने का मतलब अपने ही पक्ष को कमजोर करना होगा। एलाइनमेंट-4 की एक विकल्प के रूप में सलाह दी गई है। यदि इसे अपनाया जाता है तो एलाइनमेंट-6 'रामसेतु' के नजदीक पूजा करने जाने के लिए कोई रास्ता नहीं बचेगा।

केंद्र ने इस आरोप को खारिज कर दिया कि वह जानबूझकर एलाइनमेंट संख्या-6 के विकल्प को अपनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि परियोजना के लिए अन्य विकल्प मौजूद हैं।

नरीमन ने कहा कि परियोजना का विरोध करने वाली और रामसेतु को ऐतिहासिक स्मारक घोषित करने की माँग करने वाली तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता ने खुद एलाइनमेंट-6 के जरिए परियोजना का समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है कि वह अब परियोजना का विरोध क्यों कर रही हैं।

जयललिता के वकील ने इस तर्क का विरोध किया। पूर्व में परियोजना विरोधियों ने पर्यावरण का मुद्दा उठाते हुए इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन बताया और इस बारे में आपराधिक मामला दर्ज करने की जरूरत बताई।

वकील कृष्ण वेणुगोपाल ने कहा कि मन्नार की खाड़ी के जीव मंडल क्षेत्र में तलछट की सफाई से जीव जन्तुओं की वे प्रजातियाँ नष्ट हो जाएँगी जो वन्यजीव अधिनियम के तहत संरक्षित हैं।
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