वामपंथी दलों ने प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह पर कॉरपोरेट घरानों तथा अमेरिकी साम्राज्यवाद के हितों के लिए काम करने और भारतीय जनता पार्टी पर केवल बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती को रोकने के लिए मनमोहन सरकार के साथ हाथ मिला लेने का आरोप लगाया है।
प्रमुख वाम नेताओं ने कांग्रेसनीत संप्रग सरकार के विश्वास मत पर लोकसभा में चर्चा के उत्तर के दौरान डॉ.सिंह के हमले पर पलटवार करते हुए बुधवार को कहा कि यह प्रधानमंत्री का नहीं, विश्व बैंक के पूर्व कर्मचारी का वक्तव्य लगता है। इस वक्तव्य से देशी विदेशी बड़े व्यापारिक घरानों के प्रति उनकी सिद्धांत निष्ठा की झलक मिलती है।
ज्ञातव्य है कि प्रधानमंत्री ने मंगलवार को विश्वास मत पर चर्चा पर अपने जवाब में वाम दलों पर उनसे गुलाम की तरह व्यवहार करने की अपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा था कि वे मुझे हर कदम पर रोकना चाहते थे, जो मुझे अस्वीकार्य है। वे चाहते थे कि मैं उनके गुलाम की तरह व्यवहार करूँ।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता एबी बर्धन और राष्ट्रीय सचिव शमीम फैजी ने कहा गुलामी लादने से आशय यह है कि राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, सूचना का अधिकार अधिनियम और वन कानून आदि लोक हित के कदम उन्होंने वाम दलों के दबाव में उठाए, जबकि वह तो केवल कार्पोरेट घरानों और अंतरराष्ट्रीय ऋण के हितों से संबंधित मामलों को ही आगे बढ़ाना चाहते थे।
|