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माकपा को प्रधानमंत्री की भाषा पर आपत्ति  Search similar articles
माकपा ने वामपंथी दलों पर हमले के लिए प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह की ओर से कहे गए 'बंधुआ मजदूर' जैसे शब्दों पर आपत्ति जताई है। पार्टी ने कहा कि इससे प्रधानमंत्री कार्यालय की गरिमा पर सवाल उठते हैं।

पार्टी पोलित ब्यूरो की सदस्य वृंदा करात ने कहा कि प्रधानमंत्री अपनी बात कहने के लिए शब्दों का चयन करने को लेकर स्वतंत्र हैं, लेकिन इस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल करना क्या सही है?

वृंदा से प्रधानमंत्री के उस बयान के बारे में पूछा गया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि वाम दल चाहते थे कि वे बंधुआ मजदूर की तरह काम करें। माकपा नेता ने कहा कि इससे पीएमओ की गरिमा पर सवाल उठते हैं।

वाम दलों के सहयोग से मनमोहनसिंह के प्रधानमंत्री बनने का जिक्र करते हुए वृंदा ने कहा कि जब उन्होंने हमारा समर्थन लिया तब ऐसे में अब वे ऐसी बातें क्यों कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री की एक और टिप्पणी कि माकपा को अपने महासचिव के 'गलत आकलन' पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अन्य राजनीति दलों की तुलना में पार्टी की अलग राजनीतिक संस्कृति है।

उन्होंने कहा कि महासचिव (प्रकाश करात) का रुख पार्टी पोलित ब्यूरो और केंद्रीय समिति के फैसले पर आधारित है। हमारी पार्टी में व्यक्तिगत भूमिका लोकतांत्रिक संस्कृति के जरिए मजबूत होती है। सब कुछ सामूहिक होता है। वृंदा करात ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री को दोष नहीं दे सकती, क्योंकि उनकी (कांग्रेस की) अलग संस्कृति है।
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