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सोमनाथ चटर्जी को माकपा ने निकाला  Search similar articles
करीब दो सप्ताह तक चली खींचतान के बाद बुधवार को अंतत: मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी को पार्टी से निकाल दिया।

लोकसभा में सरकार द्वारा मंगलवार रात विश्वास मत हासिल करने के बाद आज माकपा की पोलित ब्यूरो की बैठक में चटर्जी को पार्टी से निकाल दिया गया। देश के लोकतंत्र के इतिहास में यह पहली घटना है, जब लोकसभा अध्यक्ष को पार्टी से निकाल दिया गया।

पश्चिम बंगाल के बोलपुर से सांसद चटर्जी के साथ पार्टी का टकराव तब शुरू हुआ, जब उन्होंने विश्वास मत से पहले लोकसभा अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था।

करीब 40 साल से पार्टी के सदस्य रहे चटर्जी विवादों में तब घिरे जब वामदलों ने संप्रग सरकार से समर्थन वापस लिया और राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को समर्थन वापसी की सौंपी गई सूची में चटर्जी का भी नाम था।

यह देखते हुए भाजपा और अन्य विपक्षी दलों ने चटर्जी के इस्तीफे की माँग की। माकपा नेताओं ने चटर्जी पर इस्तीफा देने का नैतिक दबाव भी बनाया और यह कहा कि चटर्जी इस्तीफा देने के बारे में खुद फैसला लें, लेकिन चटर्जी ने यह कहते हुए इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था कि वह सभी दलों द्वारा सर्वसम्मति से लोकसभा अध्यक्ष चुने गए हैं।

माकपा के शीर्ष सांगठनिक निकाय 85 सदस्यीय केन्द्रीय समिति ने चटर्जी से संबंधित विवाद पर पोलित ब्यूरो से उचित समय पर उचित कार्रवाई करने के लिए अधिकृत किया था।

25 जुलाई, 1929 को असम के तेजपुर में जन्मे चटर्जी 1968 में पार्टी के सदस्य बने थे। वे 1971 में लोकसभा के लिए चुने गए। उसके बाद वे नौ बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। 1984 में वे जादवपुर निर्वाचन क्षेत्र से ममता बनर्जी से चुनाव हार गए थे।

1996 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार मिला था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक वकील के रूप में की थी। उन्होंने कोलकाता के प्रेसिडेंसी कॉलेज तथा कोलकाता विश्वविद्यालय एवं कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से भी शिक्षा ग्रहण की। उनके पिता निर्मल चटर्जी अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के अध्यक्ष थे। पर बाद में वह हिन्दू महासभा छोड़कर वामपंथी राजनीति में शामिल हो गए तथा माकपा के समर्थन से वे सांसद भी बने।

निष्कासन से दुखी हैं सोमनाथ : चटर्जी ने स्वयं को माकपा से निष्कासित किए जाने जाने पर दुख व्यक्त किया है। माकपा के पोलित ब्यूरो द्वारा पार्टी से निष्कासित किए जाने के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए चटर्जी ने कहा कि उन्हें इससे दुख पहुँचा है। उन्होंने कहा कि वह हमेशा पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं।

चटर्जी ने कहा कि उन्होंने कभी पार्टी विरोधी गतिविधि में हिस्सा नहीं लिया और न ही कभी पार्टी के अनुशासन को तोड़ा। पार्टी के पोलित ब्यूरो ने आज अपनी बैठक में चटर्जी को पार्टी से निकालने का फैसला किया है।
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