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भाजपा के आठ बागी सांसद निष्कासित  Search similar articles
मनमोहन की जीत 'दागी विजय'-आडवाणी
भाजपा ने मनमोहन सरकार को मिले विश्वासमत को 'दागी विजय' करार देते हुए पार्टी के आठ ऐसे सांसदों को तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया है, जिन्होंने मंगलवार को लोकसभा में सरकार के पक्ष में मतदान किया या अनुपस्थित रहे।

भाजपा अध्यक्ष राजनाथसिंह की अध्यक्षता में बुधवार सुबह यहाँ हुई पार्टी के पदाधिकारियों की बैठक में पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने वाले आठ सांसदों के निष्कासन का फैसला किया गया और दलबदल कानून के तहत इन सांसदों की लोकसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिका दायर कर दी गई।

बैठक के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी और सिंह ने यह घोषणा की। जिन सांसदों को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है वे हैं- उत्तरप्रदेश के बृजभूषण शरण सिंह, गुजरात के सोमाभाई पटेल और बाबूभाई कटारा, कर्नाटक के मंजूनाथ कुन्नुर, एचटी सांगलियान और श्रीमती मनोरमा माधवाराज, मध्यप्रदेश के चन्द्रभान सिंह तथा महाराष्ट्र के हरिभाऊ राठौड़।

भाजपा अध्यक्ष ने जहाँ इन आठों सांसदों को पार्टी से निष्कासित किए जाने की घोषणा की वहीं आडवाणी ने बताया कि दलबदल कानून के तहत इन सांसदों की सदस्यता समाप्त करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी को आज याचिका सौंप दी गई और उनसे इस पर जल्द से जल्द निर्णय लेने का आग्रह किया गया।

आडवाणी ने मनमोहन सरकार की जीत को 'दागी विजय' करार दिया और कहा कि जिस तरीके से सांसदों की खुलेआम खरीद-फरोख्त की गई, वह लोकतंत्र के लिए अत्यंत खतरनाक है। कल के दिन को संसद के इतिहास में 'कालादिवस' के रूप में जाना जाएगा।

उन्होंने बताया कि पार्टी के तीन सांसदों को रिश्वत के तौर पर जिस तरह से एक करोड़ रुपए दिए गए वह अत्यंत शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि इस रिश्वत प्रकरण को एक टीवी चैनल ने भी रिकॉर्ड किया था और वह उसे कल प्रसारित भी करने वाला था, लेकिन अब उसने अपना इरादा क्यों बदला, यह एक रहस्य है। चैनल ने इस रिकॉर्डिंग का टेप लोकसभा अध्यक्ष को भी देने की घोषणा की थी, लेकिन उसने ऐसा नही किया।

यह पूछे जाने पर कि क्या भाजपा इस कांड की संयुक्त संसदीय समिति से जाँच कराने की माँग करेगी, आडवाणी ने कहा कि पार्टी चाहती है कि चटर्जी इस मामले की जाँच करें जिससे कि सारे तथ्यों का जल्द से जल्द खुलासा हो सके। उन्होंने कहा कि मैं समझता था कि कल की घटना के बाद प्रधानमंत्री स्वयं कहेंगे कि वे इसकी जाँच कराएँगे और मामले की तह तक जाएँगे।

प्रधानमंत्री इस्तीफा दें : आडवाणी ने कहा कि रिश्वत प्रकरण की जानकारी लोकसभा अध्यक्ष को दी गई और इसके बाद प्रधानमंत्री को अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक हक नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर क्रॉस वोटिंग नहीं हुई होती तो संप्रग सरकार विजयी नही हुई होती।

यह पूछे जाने पर कि क्या भाजपा के पास उसके सांसदों को रिश्वत देने के सबूत हैं, आडवाणी ने कहा कि यह स्टिंग ऑपरेशन भाजपा ने नहीं एक टीवी चैनल ने किया था और उसके पास इसका टेप मौजूद है। उन्होंने कहा कि कि रिश्वत में दिए गए पैसों को साहसिक सांसदों ने सदन पटल पर रख दिया था, जो एक गंभीर घटना है तथा इस मामले की तुलना सामान्य आपराधिक मामले से नहीं की जा सकती।

आडवाणी ने कहा कि परसों से कल शाम तक इतनी चर्चाएँ चल रही थीं, उनमें यही कहा जा रहा था कि सरकार हर कीमत पर विश्वास मत हासिल करने पर तुली है, चाहे इसके लिए सीबीआई जैसी सरकारी संस्थाओं का दुरुपयोग, प्रलोभन, डराना, धमकाना आदि क्यों न करना पड़े। उन्होंने कहा कि सांसदों को रिश्वत देने संबंधी मामले की संसदीय कारवाई विदेशों में लोगों ने देखी होगी तो वे सोच रहे होंगे कि भारत में 1947 से लोकतंत्र बहाल है और वहाँ अब काला धब्बा लग गया है।
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