संसद में मनमोहन सरकार के विश्वास मत जीतने के बाद अब भारत परमाणु कारोबार में छूट के लिए परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह एनएसजी का समर्थन जुटाने के लिए इसी सप्ताह एक जोरदार अभियान चलाने की तैयारी में है। मंत्रियों और अधिकारियों का एक समूह परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह के विभिन्न देशों में जाएगा और भारत-अमेरिका परमाणु करार पर उनका समर्थन हासिल करने का प्रयास करेगा।
इस दौरान खास तौर से उन देशों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिन्हें अब तक भारत को छूट दिए जाने पर आपत्ति रही है। सरकार को उम्मीद है कि आईएईए का संचालक मंडल (बोर्ड ऑफ गवर्नर्स) एक अगस्त को होने वाली बैठक में भारत के सुरक्षा मानक समझौते को मंजूरी दे देगा। संचालक मंडल से मंजूरी मिलने के बाद भारत को एनएसजी से आम सहमति से यह मंजूरी लेनी होगी कि वह अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के साथ असैनिक परमाणु सहयोग कर सकता है। सूत्रों ने बताया कि अभियान के तहत भारत से कपिल सिब्बल, पृथ्वीराज चव्हाण और आनंद शर्मा को विभिन्न देशों में भेजा जाएगा और वे उन्हें भारत की स्थिति की जानकारी देने के साथ ही उसे यह छूट दिए जाने के कारणों का खुलासा करेंगे।
मंत्रियों के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन, विदेश सचिव शिवशंकर मेनन और विदेश मंत्रालय के अन्य अधिकारी भी समर्थन जुटाने के इस अभियान के तहत एनएसजी देशों की यात्रा करेंगे।
ऐसी उम्मीद है कि सरकार इस अभियान में शामिल भारतीय मंत्रियों और अधिकारियों को संबद्ध देशों की सरकारों से मुलाकात के लिए भी कह सकती है ताकि करार के प्रति समर्थन जुटाया जा सके। सुरक्षा मानक समझौते को मंजूरी और एनएसजी से मिलने वाली रियायत भारत-अमेरिका परमाणु करार के कार्यान्वयन के प्रमुख चरण है।
इन चरणों से पार होने के बाद समझौते पर अमेरिकी कांगेस की मंजूरी लेनी होगी। संप्रग सरकार के विश्वास मत हासिल करने के बाद अमेरिका ने कहा कि वह आईएईए और एनएसजी की प्रक्रियाओं में तेजी लाने के लिए भारत सरकार के साथ मिलकर काम करेगा।
|