मुख्य पृष्ठ > खबर-संसार > समाचार > राष्ट्रीय
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
मनमोहन की नजर में नौ राष्ट्रीय चिंताएँ  Search similar articles
प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने मंगलवार को लोकसभा में विश्वास मत पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए नौ राष्ट्रीय चिंताओं को गिनाया और कहा कि सरकार का ध्यान इनसे अलग नहीं हुआ है।

प्रधानमंत्री के शब्दों में राष्ट्रीय चिंताएँ निम्न हैं-

1. तेल कीमतों में भारी वृद्धि से उत्पन्न आयातित मुद्रास्फीति से निपटना। हमारा प्रयास है कि विकास और रोजगार दर को छेड़े बिना मुद्रास्फीति पर नियंत्रण किया जाए।

2. कृषि क्षेत्र में जान फूँकना। हमने कृषि क्षेत्र में निवेश और संसाधनों के गिरते प्रवाह को निर्णयात्मक तरीके से उलट दिया है। हमने इस संबंध में जो उपाय किए हैं, उन्हें वित्तमंत्री लागू कर रहे हैं। हमने 23 करोड़ 10 लाख टन का रिकॉर्ड अनाज उत्पादन हासिल किया है। लेकिन कृषि उत्पादकता को बढ़ाने के लिए हमें अपने प्रयासों को दोगुना करना पड़ेगा।

3. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम सर्व शिक्षा अभियान राष्ट्रव्यापी दोपहर भोजन योजना भारत निर्माण जैसे गरीब समर्थक कार्यक्रमों में सुधार तथा सड़कों, बिजली, सुरक्षित पेयजल, साफ-सफाई, सिंचाई, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन तथा जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन की गुणवत्ता में सुधार लाना। इन कार्यक्रमों के ठोस परिणाम मिल रहे हैं, लेकिन क्रियान्वयन की गुणवत्ता में सुधार के लिए काफी कुछ करने की जरूरत है।


4. हमने उच्च शिक्षा के विस्तार पर अधिक जोर देने की पहल की है। मकसद है कि उच्च शिक्षा में सकल पंजीकरण अनुपात को 11वीं योजना तक 11.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत और 12वीं योजना के अंत तक 21 प्रतिशत कर दिया जाए।

इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए हमारे पास एक महत्वकांक्षी कार्यक्रम है, जिसमें 30 नए विश्वविद्यालय कायम करना शामिल है। इनमें से आठ विश्व स्तरीय होंगे। इनमें सात नए आईआईएम, 20 नए आईआईटी, पाँच नए आईआईएसईआर, दो स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, 10 नए एनआईआईटी, 373 नए डिग्री कॉलेज और 1000 नए पोलिटेक्निक शामिल हैं।

ये केवल योजनाएँ नहीं हैं। तीन नए आईआईएसईआर का परिचालन शुरू हो गया है और दो का 2008-09 शैक्षणिक सत्र से शुरू हो जाएगा। छह नए आईआईटी अपनी कक्षाएँ इस वर्ष शुरू कर देंगे। नए विश्वविद्यालयों के प्रतिष्ठान योजना के उन्नत स्तर पर हैं।

5. राष्ट्रव्यापी दक्षता विकास कार्यक्रम और शिक्षा का अधिकार कानून का गठन।

6. नई पुनर्वास एवं पुन: बसावट नीति को संसद की मंजूरी दिलवाना और असंगठित क्षेत्र में कामगारों को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए कानून का गठन।

7. अल्पसंख्यकों के लिए 15 सूत्री नया कार्यक्रम, अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति के अधिकारिता कार्यक्रम को प्रभावी तरीके से लागू करना और आदिवासियों के भूमि अधिकारों को प्रभावी रूप से लागू करवाने पर विशेष जोर।

8. सूचना का अधिकार कानून को प्रभावी रूप से लागू करना भी उतना ही जरूरी है ताकि शासन की प्रक्रिया में पारदर्शिता आ सके। हमारे सार्वजनिक प्रशासन को चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए प्रशासनिक सुधार आयोग ने मूल्यवान सुझाव दिए हैं।

9. आतंकवादी तत्वों, वामपंथी चरमपंथ और सांप्रदायिक तत्वों से कड़ाई से निपटना, जो देश की सुरक्षा और स्थिरता से कम करने का प्रयास कर रहे हैं। हम प्रमुख आतंकवादी घटनाओं की कड़ाई से जाँच करते रहे हैं और करते रहेंगे।

तकरीबन सभी मामलों में आरोप-पत्र पेश कर दिये गये हैं। हमारी खुफिया एजेंसियाँ और सुरक्षा बल बेहद कठिन परिस्थितियों में बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।

उन्हें हमारे पूरे सहयोग की जरूरत है। हम उनके कामकाज को चुस्त-दुरुस्त बनाने और उनकी प्रभाव क्षमता को मजबूत करने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।
और भी
अपना बचपन नहीं भूले मनमोहन
सरकार का फैसला सही साबित-राहुल
भाजपा की ओर सर्वाधिक क्रॉस वोटिंग
विश्वास के लिए धन्यवाद
लोकसभा में 11वीं बार विश्वास मत
मैं वामदलों का बंधुआ नहीं-प्रधानमं‍त्री