प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह देश के इस महत्वपूर्ण पद पर आसीन होने के बावजूद अपने बचपन के उन दिनों को नहीं भूले हैं, जब उन्हें बेहद कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। मनमोहन ने कहा कि मैं जब से भारत का प्रधानमंत्री बना हूँ हर दिन मैं उस गाँव में बिताए गए अपने जीवन के आरंभिक दस वर्षों की याद करने की कोशिश करता हूँ, जहाँ न पेयजल आपूर्ति थी, न बिजली थी, न अस्पताल था, न सड़क थी और ऐसा कुछ भी नहीं था, जिसे आज के आधुनिक जीवन से जोड़ा जा सके।
लोकसभा में विश्वास मत पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि देश ने उन्हें यह सुनिश्चित करने का अवसर दिया है कि भविष्य में हमारे बच्चों का जीवन इस प्रकार का नहीं हो।
मनमोहनसिंह ने कहा महोदय मेरी अंतरआत्मा स्पष्ट है कि जिस दिन से मैंने यह उच्च पद संभाला है। हर दिन मैंने उस दूरदराज के गाँव वाले बच्चे के स्वप्न को पूरा करने का प्रयास किया है।
उन्होंने कहा कि मैंने इस उच्च पद पर रहकर जो कुछ भी किया है, वह साफ अंतरआत्मा के साथ और देश एवं हमारे लोगों की भलाई को ध्यान में रखकर किया है।
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