विपक्ष विशेषकर राजग की ओर से बड़े पैमाने पर अनुपस्थिति और क्रॉस वोटिंग ने सरकार के विश्वास प्रस्ताव जीतने की राह आसान कर दी और काँटे की टक्कर की सभी भविष्यवाणियाँ धरी की धरी रह गईं।
मुख्य विपक्षी दल भाजपा की स्थिति सबसे खराब रही। उसके छह सांसदों ने क्रॉस वोटिंग करते हुए प्रधानमंत्री के प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने स्वीकार किया कि दस सांसदों ने दूसरे पक्ष की ओर मत दिया है।
उन्होंने कहा कि संप्रग की वास्तविक संख्या 265 की थी, लेकिन वे दस सांसदों को तोड़ने में सफल रहा। भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि कर्नाटक के सांसदों की वजह से पार्टी को काफी ज्यादा नुकसान हुआ है।
बीजद, जदयू, शिवसेना और अकाली दल जैसे राजग के अन्य घटकों के सांसदों ने भी अपनी पार्टियों की व्हिप की अवहेलना करते हुए सरकार के पक्ष में मतदान किया।
भाजपा के निलंबित सांसद सोमाभाई पटेल, बाबू भाई कटारा (दोनों गुजरात), बृजभूषण शरणसिंह (उत्तरप्रदेश), चंद्रभानसिंह (मध्यप्रदेश), हरिभाऊ राठौड़ (महाराष्ट्र), मंजुनाथ (कर्नाटक) और सांगलियाना (बेंगलुरु) ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। यह बात भाजपा नेताओं ने स्वीकार की। उडुपी से महिला सांसद मनोरमा माधवराज अनुपस्थित रहीं, हालाँकि वे चर्चा के समय सदन में मौजूद थीं।
जदयू के दो सांसदों पीपी कोया (लक्षद्वीप) और रामस्वरूप प्रसाद (नालंदा) के अलावा बीजद के दो सांसदों ने संभवत: क्रॉस वोट किया, जबकि अकाली दल के एक सदस्य के बारे में भी क्रॉस वोटिंग की बात कही जा रही है। शिवसेना के सांसद तुकाराम रेंगे अनुपस्थित थे।
संप्रग सरकार के पक्ष में वोट देने वाले सांसद हरिहर स्वैन के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करते हुए बीजद ने उन्हें निष्कासित कर दिया।
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