समाजवादी पार्टी के नेता अमरसिंह ने दावा किया है कि भाजपा चार दिन पहले मनमोहनसिंह सरकार को गिराने का एक ताजा प्रस्ताव लेकर समाजवादी पार्टी के पास आई थी और भाजपा का यह भी कहना था कि इस पहल को वाम दलों और बसपा का भी समर्थन प्राप्त है।
'आईबीएन 7' को दिए इंटरव्यू में अमरसिंह ने कहा कि पार्टी ने इस ताजा प्रस्ताव को तत्काल उसी तरह ठुकरा दिया, जैसे उसने करीब एक साल पहले राष्ट्रपति चुनाव के समय ठुकरा दिया था।
सपा नेता ने कहा उनकी पार्टी ने प्रस्ताव को ठुकरा दिया, क्योंकि भाजपा के साथ गठजोड़ का कोई सवाल ही नहीं उठता। सांप्रदायिकता देश के लिए किसी भी अन्य मुद्दे के मुकाबले ज्यादा बड़ा खतरा है।
सिंह ने कहा भाजपा नेता जसवंतसिंह दो जुलाई को शाम चार बजे उनके निवास पर आए थे। उसी दिन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन परमाणु करार के मुद्दे पर सपा नेताओं से मिलने वाले थे।
जसवंतसिंह ने दो टूक लहजे में कहा था कि इटली की इस सरकार को जाना चाहिए। जसवंतसिंह ने प्रस्ताव रखा कि भाजपा यूएनपीए के नेतृत्व वाली सरकार को बाहर से समर्थन देगी। यह नई सरकार उसी तरह की होगी जैसी 1989 में विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार थी।
सिंह ने कहा उन्हें जसवंतसिंह के इस दावे को सुनकर हैरानी हुई कि इस मुद्दे पर भाजपा, वामदल और बसपा की एक जैसी राय है।
सपा नेता का यह खुलासा चौंकाने वाला है, क्योंकि शनिवार को जसवंतसिंह ने स्वीकार किया था कि राष्ट्रपति पद के चुनाव के दौरान भैरोसिंह शेखावत को समर्थन देने के एवज में राजग ने यूएनपीए के किसी भी सदस्य को प्रधानमंत्री पद पर बाहर से समर्थन देने की पेशकश की थी।
जसवंत सिंह ने यह भी माना था कि शेखावत जब राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव मैदान में थे, राजग ने यह तय किया था कि यूएनपीए अगर उन्हें समर्थन देता है तो प्रधानमंत्री पद के लिए उनका जो भी उम्मीदवार होगा, राजग उसे बाहर से समर्थन देगी।
जसवंतसिंह ने कहा था कि उन्होंने राजग की तरफ से अन्नाद्रमुक प्रमुख जयललिता के जरिए यूएनपीए तक यह पेशकश पहुँचाई थी।
भाजपा पिछले कुछ दिनों से इस खबर को बेबुनियाद बताती रही थी। जब उनसे चार दिन पहले अमरसिंह के यहाँ जाने का औचित्य पूछा गया था तो उन्होंने महज यह कहा था कि वे सिर्फ यह पता लगाने गए थे कि समाजवादी पार्टी में हवा का रुख क्या है।
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