सरकार ने आज 10 या इससे अधिक कर्मचारियों वाले उद्योगों को कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) के दायरे में लाए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, जबकि पहले यह सीमा 20 या इससे अधिक कर्मचारियों की थी।
चालू वित्त वर्ष के लिए ईपीएफ समूह कोष (कापर्स फंड) की ब्याज दरों में संशोधन का निर्णय ईपीएफओ की अगली बैठक तक के लिए टाल दिया गया।
केंद्रीय श्रम मंत्री ऑस्कर फर्नांडीस की अध्यक्षता वाले केंद्रीय भविष्य निधि फंड बोर्ड के सदस्यों की उच्च स्तरीय बैठक में निर्णय लिया गया कि 10 या इससे अधिक कर्मचारी वाले उद्योग अब ईपीएफ में योगदान करेंगे।
फर्नांडीस ने कहा कि उद्योगों के लिए तय सीमा में संशोधन किया गया है और अब 10 या इससे अधिक कर्मचारियों वाले उद्योगों को ईपीएफ राशि काटनी पड़ेगी। फिलहाल 20 या इससे अधिक कर्मचारियों वाले उद्योग ही ईपीएफ के दायरे में हैं।
सीटू नेता और ईपीएफ बोर्ड के सदस्य डब्ल्यूवी वरदराजन ने कहा कि यह एक महत्पूर्ण फैसला था और कई उद्योग ऐसे थे जिन्हें ईपीएफ के दायरे में लाना जरूरी था। उद्योगों की ओर से विरोध व्यक्त किया गया, लेकिन यह कर्मचारियों के हित में था।
उन्होंने कहा हम चाहते हैं कि दरों में संशोधन हो। मौजूदा दरें पर्याप्त नहीं हैं। सरकार को ब्याज दरों के बारे कोई निर्णय लेने से पहले बढ़ती मुद्रास्फीति का ध्यान रखना होगा।
वरदराजन ने कहा कि बोर्ड ने ईपीएफ राशि की अदायगी में चूक कर रहे उद्योगों के मसले पर भी विचार किया। ये उद्योग नुकसान की भरपाई के मामले में ढील देने की अपील कर रहे हैं।
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