परमाणु करार पर समाजवादी पार्टी का साथ मिलने के संकेतों से उत्साहित कांग्रेस ने विश्वास जताया है कि वामदलों के समर्थन वापस लेने से मनमोहन सरकार पर कोई आँच नहीं आएगी हालाँकि उसने इसका खुलासा नहीं किया कि बहुमत के लिए जरूरी संख्या कहाँ से आएगी।
परमाणु करार पर आगे बढ़ने की सरकार की मंशा को देखते हुए वामदलों के किसी भी समय समर्थन वापस लेने की धमकियों के बीच कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख वीरप्पा मोइली ने गुरुवार को यहाँ कहा कि मनमोहन सरकार स्थिर है और स्थिर रहेगी। यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार ने बहुमत के लिए आवश्यक संख्या जुटा ली है। उन्होंने कहा कि जब हम सरकार की स्थिरता की बात कर रहे हैं तो हमारे पास संख्या भी है।
मोइली ने इस बात का खुलासा नहीं किया कि सरकार किस तरह से बहुमत जुटाएगी। उन्होंने करार को देश हित में और राष्ट्र के लिए गौरव की बात बताते हुए कहा कि कोई भी 'देशभक्त' पार्टी इस करार को लेकर सरकार को अस्थिर नहीं करेगी।
संयुक्त राष्ट्रीय प्रगतिशील गठबंधन (यूएनपीए) के खुलकर सरकार के साथ नहीं आने की ओर ध्यान दिलाए जाने पर मोइली ने कहा कि उसका फैसला नकारात्मक नहीं है और न ही हम उससे आज कोई फैसला लेने की उम्मीद कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यूएनपीए इस मसले पर और विचार करना चाहता है जिसमें कुछ भी गलत नहीं है। मोइली ने कहा कि समाजवादी पार्टी इस गठबंधन की प्रमुख पार्टी है और कोई निर्णय लेने से पहले उसका अपने सहयोगियों से बातचीत करना उचित है।
उन्होंने परमाणु करार पर वामदलों के रख की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि पता नहीं वे क्यों इस मसले पर अपना रख लगातार बदल रहे है।
उन्होंने कहा कि इस मसले पर प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह और सरकार ने उनसे कभी कुछ छिपाया नहीं है। प्रधानमंत्री ने साफ कहा है कि वह परमाणु मसले पर सिर्फ बातचीत की प्रक्रिया पूरी करना चाहते हैं तथा संसद को विश्वास में लिए बिना करार को लागू नहीं किया जाएगा। मोइली ने कहा कि क्या प्रधानमंत्री का यह आश्वासन पर्याप्त नहीं है।
मोइली ने समाजवादी पार्टी के नेता अमरसिंह के इस बयान का उल्लेख किया कि देश को परमाणु करार से ज्यादा सांप्रदायिक ताकतों से खतरा है और कहा कि वाम दलों को यह बात क्यों समझ नहीं आती। उन्होंने कहा कि क्या वाम दल सांप्रदायिक ताकतों को बढ़ावा देना चाहते अथवा वे परोक्ष रूप से सांप्रदायिक ताकतों की लड़ाई लड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि परमाणु करार देश हित में है और पूरा देश चाहता है कि इसे लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि इस मसले पर वामदलों को सरकार से समर्थन वापस लेने से पहले हजार बार सोचना पड़ेगा क्योंकि देश की जनता उनसे इसका जवाब माँगेगी।
मोइली ने कहा कि सरकार इस मसले पर सभी दलों और पूरे देश को साथ लेना चाहती है इसीलिए पिछले एक वर्ष से इस पर बातचीत की प्रकिया चल रही है यद्यपि कांग्रेस, संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन और केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद संवैधानिक रूप से सरकार के लिए ऐसा करना जरूरी नहीं था। परमाणु करार पर राष्ट्रीय बहस कराने की माँग के बारे में उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष से इस पर बहस ही तो हो रही है तथा यह बहस कब तक चलती रहेगी।
उन्होंने कुछ समाचार पत्रों में छपी इस खबर पर कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया कि सरकार को समर्थन देने के बदले में समाजवादी पार्टी ने वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम और पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा को हटाने की माँग की है। उन्होंने कहा कि हमारे सामने ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं आया है इसलिए इस पर वह कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं करेंगे।
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