दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपराध सरगना दाउद इब्राहिम के कथित प्रमुख सहयोगी रोमेश शर्मा की वह अपील विचारार्थ स्वीकार कर ली, जिसमें उसने स्वयं को कुंजम बुद्धिराजा हत्याकांड मामले में दोषी ठहराए जाने के फैसले को चुनौती दी है।
न्यायमूर्ति एचआर मल्होत्रा ने दिल्ली पुलिस को शर्मा की अपील पर नोटिस जारी किया और 23 जुलाई तक जवाब माँगा है।
शर्मा तथा पाँच अन्य व्यक्तियों को 15 फरवरी को शहर की एक निचली अदालत ने फैशन डिजाइनर तथा उसकी महिला मित्र कुंजम की हत्या के लिए दोषी ठहराया था। इन सभी को 18 फरवरी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
कुंजम की हत्या 20 मार्च 1999 को की गई थी। कोर्ट ने अन्य आरोपी जसप्रीत विरदी उर्फ सोनू को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था।
शर्मा ने 24 अप्रैल को दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी।
निचली अदालत ने शर्मा को 50 हजार रुपए और उसके भतीजे सुरेंद्र मिश्रा तथा दोषी ठहराई गई एक अन्य महिला तेजिंदर विरदी उर्फ डाली को पाँच-पाँच हजार रुपए के जुर्माने की सजा भी सुनाई थी।
अन्य दोषियों हेमचंद संतराम तथा रमेश पर एक-एक हजार रुपए का जुर्माना किया गया था।
अभियोजन के अनुसार शर्मा ने 29 वर्षीय कुंजम को मारने का षड्यंत्र तब रचा था, जब वह अनेक मामलों के सिलसिले में हिरासत में था।
शर्मा पर लोगों को धमकाने, संपत्ति हड़पने और धोखाधड़ी के कई मामले चल रहे हैं।
कुंजम को शर्मा के भतीजे सुरेंद्र मिश्र के कहने पर उत्तरप्रदेश से भाड़े पर बुलवाए गए हत्यारों ने दक्षिण दिल्ली स्थित शर्मा के फार्म हाउस में मार डाला था। मिश्रा इस मामले में सह आरोपी था।
अभियोजन पक्ष का दावा है कि घटना के पहले मिश्रा ने जेल में शर्मा से मुलाकात की थी।
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