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आधुनिक तकनीक पर तेजी से काम हो-मनमोहन  
रक्षा वैज्ञानिक हाइपर सोनिक प्रोपल्शन मानव रहित वाहनों तथा युद्धक मशीनों के विकास जैसी आधुनिक तकनीकों पर तेजी से काम करें, ताकि युद्धास्त्रों के मौजूदा चलन से कदमताल मिलाई जा सके। यह सलाह प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने दी।

तकनीक दिवस पर आयोजित समारोह में सिंह ने कहा आधुनिक सामग्री, माइक्रो-नैनो तकनीक व रोबोटिक तकनीकों की बराबरी से भारत गैर पारंपरिक तथा असंगत युद्धास्त्रों के विकास से पैदा आपात स्थितियों से निपट सकेगा।

वैज्ञानिकों को उन सामरिक तथा संवेदनशील क्षेत्रों की स्पष्ट पहचान करना चाहिए, जहाँ राष्ट्रीय क्षमता का विकास अनिवार्य है।

रक्षा उद्योग को विस्तार देने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए सिंह ने कहा हमें यह लक्ष्य दीर्घकालिक परिदृश्य व प्रतिबद्धता के साथ बढ़ाना होगा।

प्रधानमंत्री का यह कथन देश के शीर्ष रक्षा वैज्ञानिक एम. नटराजन की उस टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें नटराजन ने कहा है कि उनका संगठन 'डीआरडीओ' निश्चित क्षमता की कमी का सामना कर रहा है।

नटराजन के मुताबिक डीआरडीओ के लिए सेना, नौसेना और वायु सेना के उत्पाद तथा सेवा की जरूरतों को पूरा कर पाना असंभव है।

प्रधानमंत्री ने कहा देश के सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्र के संसाधन, ढाँचागत क्षमता व बौद्धिक पूँजी को राष्ट्रीय संपदा मानें। इनका सावधानीपूर्वक संवर्द्धन के साथ अधिकतम उपयोग होना चाहिए।

उच्च तकनीकों का विकास एक पेचीदा तथा समय लेने वाला काम है। हालाँकि डीआरडीओ व उद्योग जगत के लंबे अनुभव और विशेषज्ञता के साथ प्रयास होना चाहिए कि तकनीक तथा उपकरणों की आपूर्ति रक्षा बलों को समय से हो।

प्रधानमंत्री ने कहा हमारी रक्षा सेवाओं के समक्ष जो समस्याएँ पेश आ रही हैं, उनका उचित तकनीकी समाधान करने से उनकी लड़ाकू क्षमता का अधिकतम इस्तेमाल हो सकेगा। इससे हमारे सैनिकों के कल्याण को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

सृजनात्मकता तथा रचनात्मकता के पोषण के लिए वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग प्रतिभाओं को उचित वातावरण मुहैया कराया जाना चाहिए। रक्षा क्षेत्र में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी प्रोत्साहित किए जाने की जरूरत है।

सिंह ने कहा इससे यह सुनिश्चित हो सकेगा कि आधुनिक उत्पाद तथा प्रणालियाँ उचित लागत पर उपलब्ध होंगी।
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