बेहतर मानसून और सरकार एवं भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा किए गए उपायों के कारण मुद्रास्फीति की दर 5 से 5.5 प्रतिशत के स्वीकार्ययोग्य स्तर तक आने की उम्मीद है। यह बात प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष सी. रंगराजन ने कही।
एक अंतरराष्ट्रीय कर सम्मेलन के मौके पर सोमवार को उन्होंने कहा मुद्रास्फीति दर तीन से चार महीनों में छह प्रतिशत तक आने की संभावना है। फिर यह पाँच से 5.5 प्रतिशत तक आ सकती है। यह मानसून और निष्पादन क्षेत्र पर निर्भर करेगा।
यह केवल भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा किए गए मौद्रिक उपायों की वजह से नहीं, बल्कि अन्य चीजों के चलते होगा। उन्होंने कहा ऐसा बेस इफेक्ट के कारण होगा, क्योंकि पिछले वर्ष मुद्रास्फीति धीमी बढ़ रही थी। आकलनों के बावजूद यह कम होगा।
मुद्रास्फीति रोकने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे वित्तीय उपायों का कर संग्रह पर होने वाले प्रभाव के बारे में उन्होंने कहा राजकोषीय उपायों का कुछ तो प्रभाव होगा, लेकिन मुझे लगता है इसका ध्यान रखा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि कच्चे तेल मूल्य के 120 डॉलर प्रति बैरल से अधिक होने के कारण जीडीपी विकास दर प्रभावित हो सकती है, हालाँकि यह विकास प्रक्रिया को पटरी से नीचे नहीं उतारेगा।
अधिक तेल कीमतों का जीडीपी विकास दर पर प्रभाव होगा। यह विकास दर की गति मंद कर सकती है। जनवरी में परिषद ने 8.5 प्रतिशत की विकास दर का अनुमान जताया था, लेकिन मैं कह सकता हूँ यह आठ से 8.5 प्रतिशत हो सकता है।
केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन के अनुमानों के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था 2007-08 में 8.9 प्रतिशत की विकास दर हासिल कर सकती है।
साख निर्धारक ऐजेंसी इक्रा ने इस वर्ष अर्थव्यवस्था की 7.8 प्रतिशत विकास दर रहने का अनुमान जताया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल मूल्यों की तेजी को देखते हुए तेल उत्पादों पर कर ढाँचे को फिर से देखने की आवश्यकता है।
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