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वेणुगोपाल की जीत, पद बरकरार
मनमोहन सरकार को गुरुवार को उस समय करारा झटका लगा, जब उच्चतम न्यायालय ने उस कानून को निरस्त कर दिया जिसका उपयोग विख्यात हृदय शल्य चिकित्सक डॉ. पी. वेणुगोपाल को प्रतिष्ठित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक पद से हटाने के लिए किया गया था।

अदालती फैसले के बाद एम्स के निदेशक का पद संभालते हुए डॉ. वेणुगोपाल ने कहा कि मैंने हमेशा संस्थान की सेवा की है और मुझे आगे जो समय दिया गया है, उसमें भी अपना काम जारी रखूँगा। मैं देश के जनमानस की सेवा में लगे एम्स को बेहतर बनाने और इसका विकास चाहने वाले समान विचारधारा वाले सभी लोगों का शुक्रिया अदा करता हूँ।

66 वर्षीय वेणुगोपाल को एम्स के निदेशक पद पर पाँच साल के लिए 3 जुलाई 2003 को नियुक्त किया गया था और वे 2 जुलाई तक इस पर बने रहेंगे।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि रामदौस से टकराव के बाद एम्स कानून में किए गए संशोधन को वेणुगोपाल ने यह कहते हुए अदालत में चुनौती दी थी कि यह संशोधन उन्हें निदेशक पद से हटाने के इरादे से लाया गया है।

याचिका पर बुधवार को अपना फैसला देते हुए शीर्ष अदालत ने इस कानून को निरस्त कर दिया। अदालती फैसले के बाद स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की माँग को खारिज करते हुए रामदौस ने कहा कि एम्स के निदेशक पद से वेणुगोपाल को हटाने वाला कानून निरस्त करने का उच्चतम न्यायालय का फैसला उनके लिए कोई झटका नहीं है।

उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले पर संसद की मुहर लगी थी। सरकार न्यायालय के फैसले के अध्ययन के बाद आगे की योजना बनाएगी।
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