कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुनसिंह ने रामसेतु को आस्था का प्रश्न बताते हुए कहा है कि भगवान राम के बारे में कोई विवाद पैदा करने का कोई औचित्य नहीं है।
सिंह का यह रामभक्त चेहरा उनके ऊपर लिखी गई पुस्तक 'मोहि कहाँ विश्राम' में सामने आया है। पुस्तक के संपादक कन्हैयालाल नंदन को दिए गए लम्बे साक्षात्कार में मानव संसाधन विकास मंत्री ने सेतु समुद्रम के बारे में पूछने पर कहा कि भगवान राम के बारे में कोई भी विवाद न कोई आधार पा सकता है और न ही उसका कोई औचित्य ही है। यह हमारी आस्था का प्रश्न है। इस पर दूसरा कोई क्या सोचता है इस पर विचार ही क्यों किया जाए।
रामसेतु के मामले में सुप्रीम कोर्ट में दिए गए हलफनामे के लिए उन्होंने 'अफसरों की लापरवाही' को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि रामसेतु के बारे में इतना ही कह देना काफी था कि इस विषय पर ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। उलटे यह कह दिया गया कि उसका इतिहास नहीं है। अर्जुनसिंह पर लिखी गयी इस पुस्तक में उनकी राम भक्ति स्पष्ट करते हुए उनका चित्र प्रकाशित किया गया है, जिसके नीचे चौपाई लिखी है- 'रामकाज कीन्हे बिना मोहि कहाँ विश्राम'। इसी को पुस्तक के शीर्षक का आधार भी बनाया गया है।
आस्था के प्रश्न पर उन्होंने कहा- आस्थाओं के सही मूल्य को जो समझेगा वह उसके साथ खिलावाड़ नहीं करेगा। जो आस्थाओं के इस्तेमाल का हुनर जानता है, वही खिलवाड़ करता है। यहीं पर मेरा मतभेद है। इससे कोई खुश है या नाराज है, इससे मेरा कोई मतलब नहीं है। जो मेरा दृष्टिकोण है मैं उसी से चलता हूँ। उल्लेखनीय है कि रामसेतु को लेकर उच्चतम न्यायालय में सुनवाई चल रही है।
अर्जुन के विरोधी उन्हें मुस्लिम तुष्टिकरण करने वाले नेता के रूप में पेश करते रहे हैं, इस बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा- मैं मुसलमानों का भी हितैषी हूँ। अगर इसमें किसी को एतराज है तो मैं क्या कर सकता हूँ।
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