भारत ने सतह से सतह तक मार करने वाली अग्नि-3 मिसाइल का बुधवार को व्हीलर्स आयलैंड से परीक्षण किया, जिसकी मारक क्षमता तीन हजार किलोमीटर है।
रक्षा सूत्रों ने बताया कि मध्यम दूरी की बैलेस्टिक मिसाइल (आईआरबीएम) का उड़ीसा के तट पर प्रक्षेपण स्थल एलसी-4 से मोबाइल लांचर के जरिए प्रक्षेपण किया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि एकीकृत परीक्षण स्थल (आईटीआर) से मिसाइल का प्रक्षेपण सुबह करीब 9 बजकर 56 मिनट पर हुआ। 16 मीटर लंबी तथा 1.8 मीटर चौड़ी मिसाइल तेज आवाज करते हुए लंबवत स्थिति में आसमान में चली गई। इसके साथ ही प्रक्षेपण स्थल पर नारंगी और सफेद धुएँ का बादल फैल गया। कुछ ही क्षणों बाद मिसाइल आँखों से ओझल हो गई।
अग्नि तीन मिसाइल को निर्देशित करने के लिए उसके भीतर ही कम्प्यूटर लगाया गया है। आज के प्रक्षेपण की संपूर्ण निगरानी के लिए आधुनिक राडार, इलेक्ट्रो ऑप्टिक ट्रैकिंग सिस्टम, टेलेमिट्रिक डाटा सिस्टम के साथ ही इसके प्रभाव स्थल के समीप नौसेना के दो युद्धक पोत लंगर डाले हुए थे।
सूत्रों ने बताया फ्लाइट डाटा के विस्तृत विश्लेषण के बाद ही परीक्षण के परिणामों का पता चल पाएगा। 48 टन वजनी इस मिसाइल का पहला परीक्षण 9 जुलाई 2006 को किया गया था, लेकिन कुछ तकनीकी खामियों के कारण यह अपने मिशन में कामयाब नहीं हो पाया था।
12 अप्रैल 2007 को किए गए दूसरे परीक्षण का पूरा उड़ान मार्ग 15 मिनट का था और इस मिशन के सभी लक्ष्यों को हासिल करने में कामयाबी मिली थी।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) सूत्रों ने बताया कि मिसाइल को सेना में शामिल किए जाने से पूर्व रक्षा वैज्ञानिकों ने इसके केवल तीन परीक्षणों की योजना बनाई थी, लेकिन पहले परीक्षण के विफल रहने के कारण इसकी मजबूती को परखने के लिए अभी कुछ और परीक्षणों की जरूरत होगी।
अग्नि-3 देश की पहली ठोस ईंधन आधारित मिसाइल है, जो आवागमन के लिहाज से बेहद छोटी है तथा विभिन्न प्रकार की सतहों और उप सतहों के प्लेटफॉर्मों पर तैनाती के लिए इसे बेहद आसानी से पैक करके ले जाया जा सकता है।
5000 किलोमीटर के लक्ष्य को भेद सकता है : रूस के एक शीर्ष सैन्य जनरल ने कहा है कि 3000 किलोमीटर की मारक क्षमता वाला भारत का अग्नि-3 बैलेस्टिक मिसाइल 5000 किलोमीटर तक के लक्ष्य को भेद सकता है। अधिकारी ने यह भी कहा कि अग्नि-3 रूस के एसएस-20 परमाणु मिसाइल के समरूप है।
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